रतलाम. हरमाला रोड फूल मंडी के शेड अलॉटमेंट मामले में मुद्दा सिर्फ अहं का है। नियमों में नगर निगम सही है, जबकि व्यवहारिकता में फूल व्यापारी। इस मामले को लेकर शहर के दो दिग्गज राज्य वित्त आयोग अध्यक्ष हिम्मत कोठारी विधायक चेतन्य काश्यप आमने सामने हैं।
गुरुवार को दोनों ने ही प्रभारी मंत्री के सामने मुद्दा उठाया था। आखिरकार प्रभारी मंत्री को पूरा मामला कलेक्टर के जिम्मे करना पड़ा था। भास्कर ने तलाशा कि आखिर सही वजह क्या है। इसमें यह निकला कि पूरा मामला ‘अहं’ का ही है। इसी ‘अहं’ में शहर का विकास 25 साल से ठप पड़ा है। अगर नेता टकराव भूलकर जनहित में निर्णय करें तो यहां समस्या का हल मुश्किल नहीं है।
हरमाला रोड सब्जी मंडी 2007 में पावर हाउस रोड पर शिफ्ट हुई थी। व्यापारियों ने कृषि उपज मंडी से नीलामी में दुकानें खरीदी थीं। इन्हीं व्यापारियों को नगर सुधार न्यास ने हरमाला मंडी में 22 शेड 7-7 रुपए प्रति माह की दर पर 1982 84 में 30 साल के लिए लीज पर दिए थे। लीज मार्च 2012 2014 में पूरी हुई।
नगर निगम ने जुलाई में 90 रुपए प्रति माह की दर पर शेड की लीज सब्जी व्यापारियों को फिर से 30 साल के लिए रिन्यू कर दी। इसका पता फूल व्यापारियों को चला तो विवाद होने लगा। फूल व्यापारी वित्त आयोग अध्यक्ष कोठारी के पास पहुंचे और इसे गलत ठहराया। कोठारी का कहना है फूलमंडी में जो व्यापार नहीं करते, उन्हें लीज नहीं देना थी।
विवाद के कारण
1. जनप्रतिनिधियों का मनमुटाव
विस चुनाव के बाद अलग-अलग धड़े में बंटे भाजपा नेता इस मुद्दे पर साफ तौर पर अलग दिख रहे हैं। लीज रिन्यू की जानकारी फूल व्यापारियों से मिलने पर वरिष्ठ भाजपा नेता का फोन निगम अफसरों के पास गया था। उनका निर्देश था लीज रिन्यू नहीं होना चाहिए। जमीन फूल वालों को दी जाए। उस वक्त ये नेता पावर में नहीं थे।
दूसरे पक्ष के नेताओं ने इसे मुद्दा बनाया और हर हाल में सब्जी मंडी व्यापारियों को लीज देने की ठान ली। वरिष्ठ नेता ने पावर में आने के बाद हंगामा किया। हालांकि राज्य वित्त आयोग अध्यक्ष कोठारी, विधायक काश्यप महापौर शैलेंद्र डागा तीनों इस मुद्दे पर नियमानुसार अलॉटमेंट की बात कर रहे हैं और मनमुटाव से इंकार कर रहे हैं।
नगर निगम : नियम के मुताबिक अलाटमेंट
निगम के लेखा अधिकारी श्याम व्यास का कहना है नियम के मुताबिक पुराने लीजधारी को ही लीज रिन्यू करने का मौका दिया जाता है। उनके इंकार करने पर नए लोगों को दे सकते हैं। यहां पुराने रेंट से कई गुना ज्यादा दर पर लीज रिन्यू की है। सब्जी विक्रेताओं को सब्जी मंडी में निगम ने दुकानें नहीं दी। कृषि मंडी समिति से उन्होंने नीलामी में दुकानें खरीदी हैं।