(पंक्चर सुधारने के लिए साइिकल का पहिया खोलते सरपंच गोपाल खरे फोटो)
रतलाम। सरपंच यानी गांव का मुखिया। सेवा का जज्बा ऐसा कि मुखिया होने के बाद भी स्कूली बच्चों की साइकिल फ्री रिपेयर करते हैं। इसके बाद पंचायत जाते हैं। ये क्रम पांच साल से जारी है। उनकी इस अनूठी सेवा से आसपास के गांवों के लोग भी कायल हैं। रतलाम से आठ किमी दूर अमलेटा के सरपंच गोपाल खरे रोज सुबह 9.30 बजे गांव में दुकान पहुंचते हैं। यहां 10.30 बजे तक स्कूली बच्चों की साइकिल रिपेयर करते हैं। फिर पंचायत जाते हैं।
छुट्टी के समय शाम 4 बजे फिर दुकान आते हैं और यदि बच्चों की साइकिल में कोई खराबी है तो उसे दूर करते हैं। वे रोज 25 से 30 बच्चों की साइकिल सुधारते हैं। अमलेटा ही नहीं डेढ़ से दो किमी दूर स्थित गांव के स्कूली विद्यार्थी भी साइकिल की मरम्मत कराने आते हैं। बच्चों की खरे से आत्मीयता हो गई है।
एेसेलिया निर्णय-सीएम जब2300 से 2400 रुपए की साइकिल स्टूडेंट को फ्री दे सकते हैं तो मैं रिपेयर फ्री में क्यों नहीं कर सकता। बस यही संकल्प मन में आया और शुरू कर दी रिपेयरिंग। ऐसा करते हुए उन्हें पांच साल हो गए। इतने साल में छुट्टी को छोड़कर ऐसा एक भी दिन नहीं रहा जब उन्होंने बच्चों की साइकिल ठीक नहीं की। खरे कहते हैं आगे मैं सरपंच रहूं या रहूं लेकिन बच्चों से ऐसा लगाव हो गया है कि हमेशा फ्री में साइकिल ठीक करता रहूंगा।
अन्यको मिलेगी प्रेरणा-बीईओ एम.एल.डामर ने बताया शासन तो बच्चों के लिए बहुत कुछ कर रहा है। यदि कोई सरपंच जैसे पद पर रहते हुए बच्चों की साइकिल फ्री में ठीक कर रहा है तो ये बड़ी बात है। इससे अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिलेगी।