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वेतन मजदूरी का होता है, वात्सल्य का नहीं
रतलाम| माता-पिताने संतान को यह शरीर देकर दिव्य जीवन दिया है। दिन की शुरुआत उनके चरणों में सिर झुकाकर करो। माता-पिता की सेवा के बदले कोई अपेक्षा नहीं रखना चाहिए। वेतन मजदूरी का होता है। वात्सल्य का नहीं। हमारी किसी भी प्रवृत्ति से माता-पिता को संताप हो, इसकी सावधानी रखना चाहिए। यह बात भव्यकल्पाश्रीजी ने आराधना भवन में कही। इस मौके पर बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद थीं।