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खाद की मारामारी बनी किसान की परेशानी

7 वर्ष पहले
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खादकी मारामारी बढ़ गई है। किसानों को यह सोसायटियों पर नहीं मिल रहा है। किसान बाजार से महंगे भाव का खरीद रहे हैं। फसलों को पर्याप्त खाद नहीं मिलने से किसानों को उत्पादन कम होने का डर है।

सोसायटी से लेकर बाजार तक किसानों को खाद की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। सोसायटी में रहा खाद चंद घंटों में खत्म हो रहा है। किसानों को लंबी कतार में खड़े रहने के बावजूद खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। जिनके परमिट बन रहे हैं, उन्हें भी आवश्यकतानुसार खाद नहीं मिल रहा। अली असगर ने बताया खेत में 100 बोरी डालना है लेकिन अभी केवल छह बोरी ही मिली है। खातेधारक मियाजान खां, घनश्याम माली, निजाम मंसूरी ने बताया यूरिया की किल्लत एक-दो महीने से बढ़ गई है। अभी फसलों में खाद डालना जरूरी है। संस्था में जितनी आवश्यकता थी, उसके अनुसार परमिट नहीं बन रहे हैं।

विपणनसंघ में खुली बिक्री बंद होने से बढ़ी समस्या-आम दिनोंमें विपणन संघ के वेयर हाउस से किसानों को नकद खाद जाता था। इसकी बिक्री नवंबर से बंद होने से सोसायटी पर खाद की किल्लत बढ़ गई है। सरकार ने सीजन में ही नकद बिक्री पर प्रतिबंध लगाकर किसानों को परेशानी में डाल दिया है।

एसडीएमने कहा दो-दो बोरी बांटो-बड़ावदा| यूरियाकी कमी से परेशान किसानों की शिकायत पर एसडीएम एस.के. मिश्रा बुधवार दोपहर आकस्मिक निरीक्षण करने बड़ावदा पहुंचे। उन्होंने सोसायटियों का निरीक्षण किया। हर किसान को दो-दो बोरी खाद देने के निर्देश दिए।

अधिकारियों को बताया

^नवंबरमें 75 टन खाद किसानों को दिया। इस महीने 34 टन यूरिया मिला है जबकि 100 टन का टारगेट रहता है। खातेदार कृषकों को ही परमिट बनाकर वितरित किया जा रहा है। वेयर हाउस पर नकद बिक्री बंद होने से परेशानी बढ़ गई है। समस्या से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया है। रघुवीरसिंहसिसौदिया, सहायकप्रबंधक, सेवा सहकारी संस्था, ताल

सोसायटी में खाद के परमिट बनवाते किसान।