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प्रीमियम से ज्यादा भुगतान जमा नहीं कर रहा कम्प्यूटर

6 वर्ष पहले
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वेतनसे तो एलआईसी प्रीमियम बराबर कट रही है लेकिन जमा नहीं हो रही। ऐसा सैकड़ों पॉलिसियों में हो रहा। सेवाकर में एक साल बाद छूट के कारण ऐसे स्थिति बन रही है। नौकरी पेशा हैं और प्रीमियम वेतन से कट रही है तो एलआईसी का स्टेटस जरूर चैक कर लें। नहीं तो छह महीने बाद पॉलिसी लैप्स हो सकती है।

दरअसल एलआईसी की पॉलिसियों पर सरकार ने सर्विस टैक्स लगा दिया है। पहले साल में 3.09 इसके बाद 1.54 फीसदी टैक्स चुकाना है। जिन पॉलिसियों को एक साल हो गया उनकी प्रीमियम में अंतर रहा है। सबसे ज्यादा असर वेतन भोगी कर्मचारियों पर हो रहा है। नौकरीपेशा कर्मचारी प्रीमियम राशि वेतन से कटाना पसंद करते हैं। वे पहली प्रीमियम के मुताबिक वेतन से कटौत्रे का आवेदन देकर बेफिक्र हो जाते हैं। एक साल होने पर सर्विस टैक्स कम होने से प्रीमियम कम हो जाती है। विभाग आवेदन मुताबिक पहली प्रीमियम की तरह एलआईसी को रुपए भेजता है। ज्यादा रुपए होने पर कम्प्यूटर इसे प्रीमियम में समायोजित नहीं करता। ऐसे में रुपए एलआईसी के पास होते हुए भी प्रीमियम जमा नहीं होती। इसका असर काउंटर पर प्रीमियम जमा करने वालों पर नहीं हो रहा है क्योंकि यहां बुकिंग बाबू कम रुपए ही जमा करेगा।

एकजैसी व्यवस्था हो

एलआईसीएजेंटों के संगठन लियाफी के मप्र-छत्तीसगढ़ प्रवक्ता विष्णु बैरागी ने बताया नए नियम ने मुश्किल बढ़ा दी है। हजारों पालिसियां लैप्स हो जाएगी तो लोग बीमा नहीं कराएंगे। एलआईसी या तो खुद सर्विस टैक्स जमा करें या समान दर से टैक्स वसूले। एलआईसी द्वारा सर्विस टैक्स वसूलने से बीमा पर भी असर हो रहा है। इससे बेहतर हो एलआईसी टैक्स ले ही नहीं।

ऐसे निकल सकता हल

एलआईसीस्तर पर- पॉलिसीपर सर्विस टैक्स पहले एलआईसी देती थी। अब या तो दोबारा एलआईसी चुकाए। या फिर पहले साल से अंतिम साल तक ग्राहकों से एक समान सर्विस टैक्स वसूले।

ग्राहकये करें-ग्राहक पॉलिसीलेकर भूले नहीं बल्कि एक साल होने पर अपने बीमा एजेंट से प्रीमियम राशि पूछे। फिर ऑफिस में नई राशि के कटौत्रे के लिए आवेदन दें।

राशि रिफंड हो जाएगी

एलआईसीकी ब्रांच-2 के मैनेजर शैलेंद्र व्यास ने बताया सर्विस टैक्स से पहले साल ज्यादा राशि कटेगी। दूसरे साल आधी हो जाएगी। एक साल पूरे होने पर ग्राहक अपने विभाग में जाकर संशोधन कराएं। ताकि प्रीमियम के हिसाब से राशि कटे। ज्यादा प्रीमियम आने पर जमा करने के लिए संशोधन कराएंगे। ज्यादा मिलने वाली राशि रिफंड होगी।