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रतलाम | वर्तमानकी भागमभाग भरी जीवनशैली ने मानसिक तनाव के

7 वर्ष पहले
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रतलाम | वर्तमानकी भागमभाग भरी जीवनशैली ने मानसिक तनाव के साथ व्यक्ति को शारीरिक थकान से भी ग्रस्त कर दिया है। इसका पाचनतंत्र तथा स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है। रात में पर्याप्त नींद आने से पाचन तंत्र की सक्रियता कम होकर अनेक विकार होते हैं। पर्याप्त विश्राम से ही लंबे समय तक स्वस्थ तथा निरोगी काया का निर्माण संभव है। विश्राम तथा पूर्ण निंद्रा के लिए सोने का तरीका भी महत्वपूर्ण होता है।

मत्स्यक्रीड़ासन- विधि-जमीन पर पेट के बल लेट जाएं। दोनों हाथों की अंगुलियों को आपस में फंसाकर कोहनी से हाथ मोड़ते हुए सिर के नीचे रखें। बाएं पैर को घुटने से मोड़कर पसलियों की तरफ ले जाएं। बाएं हाथ की कोहनी को बाएं पैर की जांघ पर रखें। सिर तथा गर्दन को सीधा रखते हुए दाएं हाथ पर रखें। स्थिर अवस्था में सहज एवं सामान्य रूप से सांस लें। जितनी देर हो सके इस आसन का अभ्यास करें। बाईं तथा दाईं करवट लेकर दोनों तरफ से आसन का अभ्यास करें। आंखें बंद या खुली रख सकते हैं। यह स्थिति फड़फड़ाती मछली के समान है। इस आसन में सोया भी जा सकता है। सांस पर एकाग्रता रखें। लंबी तथा गहरी सांस से नींद अच्छी आती है। शरीर को पूर्ण आराम मिलता है।

लाभ-कमरकी अतिरिक्त चर्बी को हटाता है। पेट की आंतों को फैलाकर गतिशील करता है। साइटिका के दर्द से छुटकारा दिलाता है। रक्त संचार सुचारु कर ऑक्सीजन का प्रवाह पूर्ण करता है। कमर दर्द मेरूदंड के लिए लाभकारी है।

विशेष-विश्रामका श्रेष्ठ आसन है। कब्ज से निजात दिलाता है। वायु विकार भी दूर करता है। घुटने, कोहनी के जोड़, पंजों के जोड़ के साथ पिंडलियों की मांसपेशियों को आराम देकर गतिमय करता है।

{आशा दुबे,महामंत्रीभारत स्वाभिमान ट्रस्ट

सेहत का सोमवार