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आरडीए का काम ठप, अटकी कई रजिस्ट्रियां

6 वर्ष पहले
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- सीईओ की गैर मौजूदगी के कारण लोग हो रहे हैं परेशान।
रतलाम। रतलाम विकास प्राधिकरण (आरडीए) में सीईओ सहित अन्य अधिकारियों की कमी ने काम ठप कर दिया है। योजना 3 और 4 में जो लोग संपत्ति खरीद चुके हैं, उनकी रजिस्ट्रियां भी नहीं हो रही है। मार्च से पहले रजिस्ट्री नहीं हो पाई तो अतिरिक्त राशि चुकाना पड़ेगी।

2010 में आरडीए के गठन के बाद 29 कर्मचारी-अधिकारी पदस्थ किए गए थे। फिलहाल 7 ही काम संभाले हुए हैं। अधिकतर दूसरे शहरों के प्राधिकरण अथवा रतलाम नगर निगम से अटैच किए थे। ये मूल पदस्थापना पर लौट गए हैं। 2 महीने से प्राधिकरण में सीईओ संजय मेहता भी नदारद हैं। कलेक्टर डाॅ. संजय अग्रवाल ने उनके स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति की नियुक्ति करने के लिए प्रमुख सचिव नगरीय विकास को पत्र लिखा है। कलेक्टर ने फिलहाल एडीएम कैलाश वानखेड़े को प्रभारी सीईओ बनाया है। वे भी वेतन आहरित करवाने से अधिक कुछ नहीं कर सके हैं।

खाली हो गया कार्यालय-आरडीए में फिलहाल कार्यपालन यंत्री एच.एस. पाटीदार के अलावा सहायक यंत्री डी.सी. सक्सेना, उपयंत्री भावेश पटेल, सहायक ग्रेड-2 नीता इसरानी, निम्न श्रेणी लिपिक अशोक जायसवाल और एक प्यून है। एक लिपिक राजेश उपाध्याय निलंबित है। पाटीदार, सक्सेना और पटेल फील्ड में रहते हैं। कार्यालय में महज तीन लोग ही मौजूद रहते हैं।

जल्द आदेश जारी होंगे- कलेक्टर डाॅ. संजय गोयल ने बताया एडीएम को सीईओ के सभी अधिकार मिलने के लिए शासन के निर्देश की आवश्यकता होगी। प्रक्रिया पूरी कर ली है। जल्द ही आदेश जारी हो जाएंगे, उसके बाद प्राधिकरण गति से काम करने लगेगा।

काम प्रभावित तो मैं क्या करूं-आरडीए सीईओ संजय मेहता का कहना है बीमारी के कारण अवकाश पर हूं और फिलहाल मुंबई में हूं। कामकाज प्रभावित होता है तो मैं क्या करूं, अपने साथ अधिकार थोड़े ही ले गया हूं। रही बात कार्यालय नहीं जाने की तो ऐसा गलत है। मैं नगर निगम में रहते हुए भी नियमित कार्यालय जाता था।

पहले भी विवादों में रहे : आरडीए के सीईओ संजय मेहता पहले भी विवादों में रहे हैं। पहले वे रतलाम नगर निगम में आयुक्त थे। उन पर आरोप लगाए जाते रहे हैं कि वे घर से ही नगर निगम चलाते थे, कार्यालय कम ही जाते थे। फिलहाल भी वे किसी वरिष्ठ अधिकारी को सूचना दिए बिना दो माह से नदारद हैं।
- बंजली और करमदी में योजना 3 और 4 में प्लाॅट खरीदने वाले 25 से अधिक लोगाें की रजिस्ट्री नहीं हो सकी हैं। नए नियमों के तहत खुद सीईओ या संपदा अधिकारी को रजिस्ट्रार के समक्ष पहुंचकर संपत्ति हस्तांतरित करना होती है। प्रभारी सीईओ एडीएम को अधिकार नहीं है।

- 90 से ज्यादा लोगों से संपत्ति की दूसरी किस्त वसूलना है। संपदा अधिकारी नहीं होने से डिमांड लेटर नहीं भेजे जा सके हैं।

- योजना 3 4 पर काम करने वाले ठेकेदारों का एक करोड़ रुपए से अधिक बकाया है। कई छोटे ठेकेदारों ने तो भुगतान नहीं होने पर काम बंद कर दिया है।