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भए मगन देखत मुख सोभा। जनु चकोर पूरन ससि लोभा

6 वर्ष पहले
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हे मुनि! पिताने हमें आपके सुपुर्द किया है। अब आप ही हमारे पिता हैं, आपकी आज्ञा से बढ़कर दूसरा कोई हमारे लिए नहीं। -श्रीराम

हे मुनिवर, सभीपुत्र मुझे प्राणों के समान प्यारे हैं, उनमें भी राम को तो देते नहीं बनता। कहाँ डरावने और क्रूर राक्षस और कहाँ परम किशोर अवस्था के मेरे सुंदर पुत्र। -राजा दशरथ

हे राजन! राक्षसोंके समूह मुझे बहुत सताते हैं। छोटे भाई सहित श्रीराम को मुझे दो। राक्षसों के मारे जाने पर मैं सुरक्षित हो जाऊंगा। -मुनि विश्वामित्र

भावार्थ:- राजादशरथ ने अपने पुत्रों को मुनि विश्वामित्र के चरणों पर डाल दिया। उनसे प्रणाम कराया। श्री रामचंद्रजी को देखकर मुनि अपनी देह की सुधि भूल गए। वे श्री रामजी के मुख की शोभा देखते ही ऐसे मग्न हो गए, मानो चकोर पूर्ण चन्द्रमा को देखकर लुभा गया हो

रतलाम| श्रीटेकेश्वर महादेव मंदिर लक्कड़पीठा पर 50वां महाशिवरात्रि महोत्सव मनाया जा रहा है। बुधवार से रामलीला शुरू हुई। इलाहाबाद से आई धर्म प्रचारक रामायण रामलीला मंडल प्रयाग के कलाकार रामलीला कर रहे हैं। बाल कांड में राम जन्म के बाद मुनि श्री विश्वामित्र के साथ श्रीराम का वन जाना। ताड़का वध आदि का मंचन हुआ। फोटो-नयनडागा