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बाजार को भा रहे कागज बैग

7 वर्ष पहले
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{पढ़ाई के साथ स्वरोजगार का बनाया प्रोजेक्ट

सिटीरिपोर्टर. रतलाम

अमानक पॉलीथिन पर प्रतिबंध के चलते शहर में कागज के बैग का प्रचलन शुरू हो गया है। व्यवसायियों को गर्ल्स कॉलेज की छात्राओं द्वारा बनाए कागज बैग काफी पसंद रहे हैं। डिमांड बढ़ने से छात्राओं ने इसे रोजगार का जरिया बनाने का मन बनाया है।

गर्ल्स कॉलेज की एनएसएस से जुड़ी 50 से अधिक छात्राओं ने पॉलीथिन का विकल्प तैयार किया। उन्होंने अनुपयोगी कागज के बैग बनाए। एनएसएस की कार्यक्रम अधिकारी डॉ. अनामिका सारस्वत के मार्गदर्शन में बनाए 250 कागज बैग छात्राओं ने दो बत्ती न्यू रोड क्षेत्र के दुकानदारों को नि:शुल्क बांटे। दुकानदारों ने इन्हें सिर्फ पसंद किया बल्कि और कागज बैग उपलब्ध कराने का ऑर्डर भी दिया। डॉ. सारस्वत ने बताया छात्राएं पढ़ाई के साथ स्वरोजगार के बारे में भी जानकारी प्राप्त करें, इस उद्देश्य से एनएसएस में कागज बैग बनाने का काम शुरू किया है। अच्छा रिस्पांस मिलने से छात्राएं काफी उत्साहित हैं। प्रो. निलोफर खामोशी ने बताया न्यूज पेपर सहित अन्य कागज के बैग तैयार करवाए जा रहे हैं। छात्राओं ने इसे स्वरोजगार का जरिया बनाने का निर्णय लिया है। इसके लिए उन्हें पूरा सहयोग दिया जाएगा।

ग्रुपबनाकर करेंगे काम

छात्रासोनू गुर्जर, वर्षा गामड़, बृजेंद्रकुंवर , स्वीटी सोनार्थी, ममता परमार, अनुग्रह गोदा कागज के बैग बनाने के प्रोजेक्ट को स्वरोजगार से जोड़ने की योजना बना रही हैं। वे 5-5 छात्राओं के 10 ग्रुप बनाकर उनसे कागज बैग्स बनवाएंगी और मार्केट में विक्रय करेंगी। जो भी आय होगी वह ग्रुप की छात्राओं की शिक्षा अन्य रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण पर खर्च करेगी। एक बैग की कीमत 10 से 25 पैसे तक रहेगी। कागज के बड़े बैग 1 से 5 रुपए तक में उपलब्ध होंगे।

पढ़ाईके बाद अतिरिक्त समय

छात्राओंने बताया क्लास के बाद बाकी समय में एनएसएस के माध्यम से वे काम करती हैं। इस प्रोजेक्ट को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए हम पढ़ाई के अलावा अतिरिक्त समय देंगे।

इनके लिए उपयोगी

अच्छी पहल

{छात्राओं ने अनुपयोगी शीट अखबार के कागज से पर्यावरण को बचाने की पहल की।

{ आर्थिक रुप से कमजोर छात्राओं को स्वरोजगार से जुडऩे का मौका मिल रहा।

{ दुकानदारों लोगों को आसानी से पॉलीथीन का विकल्प मिलेगा।

प्रशिक्षणदेंगे

^एनएसएसछात्राओं ने पर्यावरण बचाने के