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पानी के परिवहन पर उठे सवाल

6 वर्ष पहले
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रतलाम। यूआईडी एसएसएमटी योजना पर 38 करोड़ से ज्यादा खर्च हो गए। धोलावड़ डेम से रोज 20 लाख गैलन अतिरिक्त पानी मिल रहा है। इसके बाद भी एमआईसी ने पहली बैठक में पानी के परिवहन पर 75 लाख रुपए खर्च करने की प्लानिंग कर डाली। इस निर्णय से कई सवाल उठ रहे हैं।

शहर की 3 लाख आबादी को पेयजल के लिए केंद्र सरकार ने 2005 में 32.65 करोड़ की यूआईडीएसएसएमटी योजना दी थी। हाल ही में ये योजना 38 करोड़ में पूरी हुई। 18 अक्टूबर 2014 को सीएम शिवराज सिंह चौहान ने लोकार्पण किया। अब शहर में 1 करोड़ गैलन पानी रोज सकता है। पानी सहेजने की व्यवस्था नहीं होने के कारण रोज 70 लाख गैलन पानी धोलावड़ से लाया जा रहा है। शहर को जरूरत रोज 50 लाख गैलन पानी की है और 20 लाख गैलन पानी अतिरिक्त रहा है। जो रेलवे टैंकरों से अन्य क्षेत्रों में भेजा जाता है।

टेंडर से तय होंगे रेट - नगरनिगम अब पेयजल परिवहन के लिए टेंडर बुलाएगी। इसमें प्रति टैंकर प्रति फेरा की दर से रेट तय होंगे।

परिवहन के लिए 75 लाख क्यों ?
एमआईसीने बुधवार को पेयजल परिवहन के लिए 75 लाख रु. के प्रस्ताव मंजूर किए हैं। ऐसे में सवाल ये उठ रहा है 38 करोड़ रु. खर्च करने के बाद भी पेयजल परिवहन पर 75 लाख रुपए खर्च करने की जरूरत क्यों पड़ रही है? धोलावड़ से शहर तक पानी लाने के पर्याप्त इंतजाम है। ऐसे में नगर निगम अपने संसाधनों से पेयजल जरूरतमंद क्षेत्रों में क्यों नहीं भेज सकता।

- सालों से पाइपलाइन विहीन क्षेत्रों में लाइन नहीं डाली जा रही। योजना के तहत 7.27 करोड़ रुपए में निगम को शहर में 103 किमी लंबी पाइप लाइन डालना है। अगर ये पाइप लाइन समय पर डाल दी जाती तो परिवहन आधा रह जाता।

- पेयजल परिवहन के हिसाब-किताब और हकीकत में खासा अंतर होता है। इस अंतर पर अधिकारी और जनप्रतिनिधियों के खर्चे टिके होते हैं। यही कारण है हर साल परिवहन का बजट बढ़ रहा हैं।

- इस बार 18 लाख अधिक बजट रखा है। जबकि डीजल के भाव कम हुए। नई टंकी शुरू होने से कई कॉलोनियों में नलों से पानी सप्लाई हो रहा है। परिवहन घट रहा है लेकिन बजट बढ़ रहा है।

- शहर के 60 फीसदी इलाकों में पाइप लाइन है। पाइप लाइन विहीन क्षेत्रों में परिवहन जरूरी।

- गर्मी में बाहरी इलाकों के ट्यूबवेल हैंडपंप सूख जाते हैं। यहां टैंकर से जलापूर्ति जरूरी।

- राजगढ़-डोसीगांव के 7 वार्डों में जमीन से लाल पानी निकलता है। यहां पानी परिवहन जरूरी।
पेयजल परिवहन टेंडर
2014 : जोन 1 45 लाख
जोन 2 12 लाख
2015 जोन 1 48 लाख
जोन2 27 लाख
(जानकारी- जलप्रदाय विभाग से प्राप्त)


जलापूर्ति प्राथमिकता : '' अल्पवर्षा से भू-जलस्तर नीचे है। लोगों की पेयजल प्राथमिकता का ख्याल रख परिवहन के प्रस्ताव को एमआईसी में मंजूरी दी। जलापूर्ति व्यवस्था मजबूत करने खर्च में कमी लाने की दिशा में भी कोशिश की जाएगी। डॉ.सुनीता यार्दे, महापौ

जलकार्य सीवरेज विभाग प्रभारी प्रेम उपाध्याय से सीधी बात
सवाल- 38करोड़ की योजना पूरी होने के बाद भी पेयजल परिवहन पर 75 लाख खर्च करने की प्लानिंग क्यों?

जवाब-यूआईडी एसएसएमटी योजना 2005 में आशा मौर्य के कार्यकाल में मिली। इसे पिछली परिषद ने पूरा किया। उनके वक्त भी पेयजल परिवहन हुआ। तब किसी ने सवाल खड़े नहीं किए। बाहरी इलाकों में पाइप लाइन नहीं होने से यह योजना बनाई गई।

सवाल-भविष्य में पेयजल परिवहन पर रोक लगाने के लिए क्या प्लानिंग है?

जवाब-कस्तूरबानगर शांति नगर टंकी की पाइप लाइन की टेस्टिंग चल रही है। नए इंतजामों पर भी विचार चल रहा है। मार्च के बाद इसके परिणाम दिखाई भी देंगे।

सवाल-टैंकर की बजाय पाइप लाइन से घर-घर पानी पहुंचाने के लिए आपकी क्या योजना है?

जवाब-रेलनगर सहित आसपास के इलाकों में पाइप लाइन डाली जा रही है। ये पूरी होने से नागरिकों को नलों से शुद्ध पेयजल मिलेगा।