खतरे में बच्चों की जान, स्कूल अनजान
येतीन मामले स्कूली वाहनों के इस्तेमाल में मासूम बच्चों की सुरक्षा पर सवाल खड़ा कर रहे हैं। बच्चे जिन वाहनों का उपयोग कर रहे हैं उनमें से कई वैध नहीं हैं। स्कूल प्रबंधन भी वाहनों की जानकारी प्रशासन से साझा नहीं कर रहे हैं। 18 जनवरी को बाल संरक्षण आयोग के निर्देश के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने 50 से ज्यादा निजी स्कूलों को पत्र भेजा था। इसमें बच्चों को ले जाने वाले वाहनों की जानकारी मांगी थी। 5 दिन में जानकारी भेजना थी। सोमवार तक 4 ही स्कूलों ने जानकारी भेजी। शेष को दोबारा नोटिस जारी किया जाएगा। रतलाम आरटीओ में 94 स्कूली वाहन दर्ज हैं। हकीकत में संख्या इससे अधिक है। शिक्षा विभाग को गुरु तेग बहादुर स्कूल ने 28, बोधि इंटरनेशनल स्कूल ने 4 संत मीरा स्कूल ने 12 वाहन की जानकारी दी।
मामला 1
रतलामपब्लिक स्कूल की 3 बसों को आरटीओ टीम ने पकड़ा। स्कूल प्रबंधन कार्रवाई के 8 दिन बाद भी 2 वाहनों के परमिट, बीमा, फिटनेस सर्टिफिकेट पेश नहीं कर सका। एक बस बिना परमिट चल रही थी। उस पर 39 हजार रु. जुर्माना किया।
मामला2
योगिंद्रसागर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की चार बसें आरटीओ ने बगैर उचित परमिट के शहर से बाहर जाने पर जब्त की थी। इनमें से एक बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। दो दिन हो गए लेकिन प्रबंधन बसों के कागजात पेश नहीं कर पाया।
मामला3
प्रशासनिकआदेश के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने 50 से ज्यादा स्कूलों से बच्चों को ले जाने वाले वाहनों की जानकारी मांगी। सेंट जोसेफ स्कूल प्राचार्य ने जानकारी दी कि उनके यहां से एक भी वाहन बच्चों को लाना ले जाना नहीं करता।
दोबारा लिखे पत्र
^अधिकांशस्कूल संचालकों ने जानकारी नहीं भेजी। सभी को स्मरण पत्र भेजा है। समय रहते जानकारी नहीं मिलेगी तो कलेक्टर कार्यालय के माध्यम से आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। जे.के.शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी
एफआईआर कराएंगे
^स्कूलीवाहनों के मामले में लापरवाही सामने आई है। इनसे लग रहा है कि स्कूल प्रबंधन वाहनों के मामले में गलतियां कर रहा है। यह संवेदनशील मामला है। ऐसे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। एफआईआर भी करवाएंगे। जे.एस.मीणा, उप क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी