रतलाम। जिले में स्वाइन फ्लू के 69 संदिग्ध मरीज सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने स्कूलों के लिए अलर्ट घोषित कर दिया है। अब यदि बच्चा सर्दी जुकाम पीड़ित है तो उसे एक सप्ताह की छुट्टी पर भेजना होगा।
स्वाइनफ्लू का खतरा भीड़ वाले इलाकों में ज्यादा रहता है। ऐसी जगह पर यह वायरस तेजी से फैलता है। स्कूलों में विद्यार्थीZ इसकी चपेट में सकते हैं। इसलिए प्रशासन ने स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग को ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। शिक्षकों को समझाइश दी है बच्चों में यदि सर्दी जुकाम के लक्षण दिखे तो उन्हें एक सप्ताह की छुट्टी पर भेज दें। इलाज की सलाह दें। साफ-सफाई रखें। हालांकि अभी तक किसी भी स्कूल में संदिग्ध मरीज सामने नहीं आया है। पर एहतियात के तौर पर नजर रखी जा रही है।
मुखिया को जानकारी नहीं- गंभीर बीमारी को लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी गंभीर नहीं हैं। शनिवार को जिला अस्पताल में कैटेगरी के 42 संदिग्ध मरीज की जानकारी रात तक सीएमएचओ डॉ. पुष्पेंद्र शर्मा तक नहीं पहुंची थी। दैनिक भास्कर ने जब डॉ. शर्मा से बात की तो उनका कहना था शुक्रवार की रिपोर्ट में 27 कैटेगरी मरीज थे। शनिवार की रिपोर्ट रविवार सुबह 8 बजे आएगी। उनके पास एक ही मरीज का स्वाब भेजने की जानकारी थी। जबकि शाम तक दो नमूने भेजे जा चुके थे। नोडल अधिकारी डॉ. जीआर गौड़ को भी रात तक कैटेगरी के संदिग्धों की जानकारी नहीं थी।
कलेक्टर ने कहा घबराएं नहीं -स्वाइन फ्लू को लेकर होटल बालाजी सेंट्रल में स्वास्थ्य विभाग ने शनिवार को कार्यशाला की। कलेक्टर डॉ. संजय गोयल ने कहा स्वाइन फ्लू से डरने की जरूरत नहीं है। बस भीड़ वाले इलाकों में जाने से बचें। हर घंटे हाथ धोते रहें। नाक, कान मुंह छूने से बचें। सर्दी-जुकाम अन्य तकलीफ होने पर डॉक्टर की सलाह लें।
श्रेणी तो घबराएं- सिविल सर्जन डॉ. आनंद चंदेलकर के अनुसार कैटेगरी में सर्दी, जुकाम, हल्का बुखार, उल्टी दस्त बदन दर्द वाले आते हैं। इसमें स्वाइन फ्लू की जांच की जरूरत नहीं होती। लक्षण अनुसार दवा देते हैं। रोगी को घर में आराम करना चाहिए। भीड़-भाड़ वाले स्थानों से बचें।
24 से 48 घंटे तक निगरानी में रखें। आराम मिलने तो डॉक्टर को दिखाएं। इसमें टेमीफ्लू, एस्प्रीन, सैलिसिलेट दवा नहीं दी जाती। बी कैटेगरी में टेमीफ्लू दी जाती है। साधारणतः स्वाइन फ्लू की जांच की जरूरत नहीं रहती। सी कैटेगरी के लक्षण में तत्काल जांच कराई जाती है इलाज किया जाता है।
क्या है स्वाइन फ्लू : स्वाइन फ्लू एच 1 एन 1 वायरस से होता है। यह वायरस मनुष्य में ड्रोपलेट इंफेक्शन से फैलता है। वायरस का इंक्यूबेशन पीरियड 1 से 7 दिन का रहता है। वायरस ठोस और सख्त स्थानों पर 24 से 28 घंटे, कपड़ों और पेपर पर 8 से 12 घंटे ही जीवित रह पाता है। हाथ पर केवल 15 मिनट ही जीवित रहता है। इससे पीड़ित मरीज में सांस में तकलीफ, सीने में दर्द, उनींदापन, लो ब्लड प्रेशर, थूक के साथ खून, नीले नाखून, चिड़चिड़ापन आदि लक्षण दिखाई देते हैं।
इन्हें माना जाता है संदिग्ध : स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीजों में उन्हीं को रखा जाता है जिन्हें सर्दी, जुकाम, खांसी, गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ होती है। इसके अलावा वह 7 दिन के भीतर किसी संभावित और कन्फर्म मरीज के संपर्क में आया हो या ऐसे स्थानों की यात्रा की हो जहां स्वाइन फ्लू के प्रकरण सामने आए हों।