डॉ. घनश्याम पांडे ने बताया हाल ही के दिनों में 10 साल से कम उम्र के बच्चों की आंख की रोशनी तेजी से कम होने के मामले सामने रहे हैं। रोज चार से पांच केस तो ही रहे है। शिविर में भी दो केस आए।
श्री अग्रसेन सोश्यल ग्रुप के शिविर में 60 से अधिक मरीजों का परीक्षण किया गया। उन्हें दवाई भी दी गई। 28,30 जनवरी को ग्रुप ने मोतियाबिंद के आपरेशन करवाए थे। उन मरीजों का चेकअप भी किया गया। बरबड़ के रहने वाले आठ साल के हरीश राठौड़ की आंख में भी कमी निकली। उसे चश्मे का नंबर दिया गया। सूरजमल जैन नगर के 18 वर्षीय रमीज खां को भी चश्मे का नंबर दिया गया। उसके रेटिना में खराबी निकली।
स्मार्टफोन फोन है कारण : डॉक्टर पांडे ने बताया कि बच्चें घंटों कार्टून देखते हंै। स्मार्टफोन पर गेम्स खेलते रहते हैं। दोनों ही घातक हैं। स्मार्टफोन से निकलने वाली किरणें आंखों को खराब कर रही हैं।
जंक फूड घातक : वर्तमान में जीवनशैली बदली है। बच्चे फिजिकल एक्टीविटी से ज्यादा इंटरनेट में व्यस्त है। वे जंक फूड का उपयोग कर रहे हैं। दोनों बातें आंख की रोशनी को नुकसान पहुंचा रही है।