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टैक्स बढ़ने के बाद इंदौर में डीजल की खपत 13 फीसदी कम
पेट्रोल और डीजल पर चार फीसदी वैट बढ़ाने के बाद से प्रदेश में डीजल की खपत गिरना जारी है। तेल कंपनियों के आकंड़ों के अनुसार इस साल जनवरी में जनवरी 2014 की तुलना में डीजल की खपत करीब 10 फीसदी कम हो गई। इससे सरकार को 10 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हो गया।
सीमावर्ती जिलों में तो हैरानी वाले आंकड़े सामने आए हैं। टैक्स बढ़ने से पहले एक माह में (19 नवंबर से 19 दिसंबर 2014 तक) डीजल की जो खपत थी, वह टैक्स बढ़ने के बाद (20 दिसंबर से 20 जनवरी 2015) 50 फीसदी तक गिर गई। हालत यह है कि पड़ोसी राज्यों के पेट्रोल पंपों पर मप्र से सस्ता पेट्रोल-डीजल बेचने के बोर्ड भी लग गए हैं। इंदौर जिले की ही बात करें तो डीजल की खपत में 13.30 फीसदी की गिरावट गई है। इस महीने विधानसभा का बजट सत्र शुरू होने जा रहा है। ऐसे में सरकार पेट्रोल-डीजल से आय बढ़ाने के लिए फॉर्मूला लाने पर गंभीरता से विचार कर रही है।
नागपुर से 40 किमी दूर छिंदवाड़ा रोड पर सावनेर में पेट्रोल पंप पर लगा बोर्ड।
प्रदेश में डीजल की खपत
कंपनी जनवरी 2014 जनवरी 2015
एचपीसीएल60 हजार 55 हजार
बीपीसीएल 80 हजार 73 हजार
आईओसीएल 91 हजार 81 हजार
कुल 231 हजार 209 हजार
आंकड़े किलो लीटर में
(जनवरी2014 में सरकार को डीजल की बिक्री से करीब 266 करोड़ रुपए टैक्स के तौर पर मिले थे, जो जनवरी 2015 में घटकर करीब 256 करोड़ रह गए।)
^सरकार ने अगर पड़ोसी राज्यों की तुलना में टैक्स बराबर नहीं किया तो यह गिरावट जारी रहेगी। -हिमेशकंपानी, सीनियर मैनेजर, एस्सार ऑइल लि.
(आंकड़े 20 नवंबर से 19 दिसंबर 2014 तक और राज्य सरकार द्वारा टैक्स बढ़ने के बाद 20 दिसंबर से 20 जनवरी 2015 तक के।)
प्रदेश के करीब 15 सीमावर्ती जिलों में दिसंबर 2014 में 11500 किलो लीटर डीजल बिका, जो जनवरी 2015 में 34 फीसदी गिरकर 7685 किलोलीटर रह गया।
इंदौर और प्रमुख सीमावर्ती जिलों में डीजल की खपत में कमीे
जिलादिसंबर जनवरी फीसदी
इंदौर300 260 13.30
बड़वानी 550 450 18
बैतूल 1500 1050 30
भिंड 530 450 15
छतरपुर 700 500 28
छिंदवाड़ा 300 270 10
धार 800 630 21
रतलाम 200 150 25