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निगम के पेंशन घोटाले में आयुक्त ने की कार्रवाई, शाखा प्रभारी को निलंबित किया

5 वर्ष पहले
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नगर निगम की पेंशन शाखा में विधवा पेंशन और राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना के काम में हुई गड़बड़ी में आखिरकार कार्रवाई कर दी गई। कलेक्टर के आदेश के बाद गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार सामाजिक सुरक्षा शाखा प्रभारी रवींद्र ठक्कर को निलंबित कर दिया। शाखा के बाबू मोइन खान को बर्खास्त करने के लिए नोटिस जारी किया है, इसके अलावा तत्कालीन डाटा एंट्री ऑपरेटर का सारे भुगतान रोक दिए हैं।

भास्कर ने 24 सितंबर 2016 के अंक में नगर निगम की सामाजिक सुरक्षा शाखा में पेंशन बांटने में हुई गड़बड़ी का खुलासा किया था। इसके बाद कलेक्टर बी. चंद्रशेखर ने डिप्टी कलेक्टर अनिल भाना से प्रकरण की जांच कराई थी। 15 दिन चली जांच के दौरान चुनिंदा प्रकरणों में गड़बड़ी का खुलासा हुआ था। इसके अलावा कुछ जांच अधिकारी ने ही पेंशन के 7 हजार और राष्ट्रीय परिवार सहायता के 283 प्रकरणों की विस्तृत जांच की अनुशंसा की। कलेक्टर ने इस प्रकरण को टीएल में भी शामिल किया हुआ है। छुट्टी पर जाने से पहले कलेक्टर इस प्रकरण में निगम आयुक्त एस.के. सिंह को कार्रवाई के लिए निर्देशित कर चुके थे। मंगलवार शाम आयुक्त सिंह ने सामाजिक सुरक्षा शाखा के प्रभारी अधिकारी रवींद्र ठक्कर को निलंबित करने के आदेश जारी कर दिए हैं। शाखा का बाबू मोइन खान मस्टर कर्मचारी है लिहाजा उसे नौकरी से बर्खास्त करने के लिए नोटिस जारी किया है। डिप्टी कलेक्टर भाना द्वारा की गई जांच में नगर निगम के पूर्व डाटा एंट्री ऑपरेटर को भी अनियमितता का आरोपी माना गया था।

ननि आयुक्त एस.के. सिंह ने बताया कलेक्टर महोदय के निर्देशानुसार कार्रवाई की है। कार्रवाई का प्रतिवेदन कलेक्टर कार्यालय भेज दिया गया है।

सहायता किसी और को दी
राष्ट्रीय परिवार सहायता के कई प्रकरणों में पोर्टल पर प्रविष्टियों को कई बार बदलकर अपात्रों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई।

परिवार सहायता के एक प्रकरण में पोर्टल पर भारती नामक महिला का नाम था, स्वीकृति आदेश भी उसी के नाम का था जबकि निगम के दस्तावेज में इस प्रकरण में उषा सिलावट नामक महिला का नाम दर्ज है।

परिवार सहायता के एक अन्य प्रकरण में राधाबाई आवेदक है। इस महिला का बैंक खाता अलग है जबकि 20 हजार रुपए की राशि मंजूरी के बाद किसी अन्य बैंक खाते में डाल दी गई।

रेखा नामक महिला को पति नरेंद्र की मृत्यु होने पर 20 हजार रुपए की आर्थिक सहायता जारी की गई, पेंशन शाखा में इस प्रकरण का कोई रिकॉर्ड ही नहीं है।

सलमा पति शकूर नामक महिला को श्रवण बाधित बताकर उसके नाम से विकलांग पेंशन जारी की जा रही है जबकि वह विकलांग नहीं है और उसे वृद्धा पेंशन पहले से मिल रही है। ऐसे कई सारे प्रकरणों में अपात्र लोगों को पेंशन जारी कर दी गई है।

(डिप्टी कलेक्टर द्वारा कलेक्टर को सौंपे गए जांच प्रतिवेदन के अनुसार)

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