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‘श्रेष्ठ कार्य यज्ञ की गिनती में आते हैं’

5 वर्ष पहले
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सभी श्रेष्ठ कार्य यज्ञ होते हैं। दान, गाय की सेवा, देश की सेवा, पशु-पक्षियों, मनुष्य की रक्षा करना सभी प्रकार के श्रेष्ठ कार्य यज्ञ की गिनती में आते हैं। यज्ञ जन्म से लेकर मरण तक चलता है। दुनिया में केवल जो धर्म है वह सनातन धर्म है। यह बात प्रकाश आर्य (सार्वदेशिक महामंत्री आर्य प्रतिनिधि सभा दिल्ली) ने कही।

वे त्रिवेणी तट पर श्री सनातन धर्मसभा एवं महारूद्र समिति द्वारा आयोजित 63वां महारूद्र यज्ञ के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में अमृत वचन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। आर्य ने यज्ञ का भौतिक, आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक महत्व समझाया। अध्यक्षता कर रहे राकेश मीणा (पार्षद) ने भी अपने विचार व्यक्त किए। भगवानदास अग्रवाल ने अतिथियों का परिचय दिया। स्वागत समिति अध्यक्ष कोमलसिंह राठौड़, उपाध्यक्ष लालचंद टाक, महामंत्री नवनीत सोनी, गोपाल जवेरी, तारादेवी सोनी (वरिष्ठ पार्षद), आशा शर्मा आदी ने किया। संचालन पुष्पेंद्र जोशी ने किया।

श्रद्धालुओं ने दी यज्ञ में आहुतियां- त्रिवेणी तट पर महारूद्र यज्ञ मंगलवार को शुरू हुआ। बुधवार को श्रृद्धालुओं ने मुख्य यजमान हरीशचंद्र एवं प्रेमादेवी सोलीवाल के साथ यज्ञ में आहुतियां दी। शाम को महाआरती के बाद सभी ने प्रसादी ग्रहण की। गुरुवार को सनातन धर्म के पुरोधा संत कबीर पर व्याख्यान प्रमुख वक्ता डॉ. कमला शर्मा द्वारा दिए जाएंगे।

अमृत वचन कार्यक्रम में उपस्थित महिलाएं। इनसेट- संबोधित करते अतिथि।

महारुद्र यज्ञ
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