रतलाम। सरकार उद्योगपतियों से बगैर चर्चा उद्योग केंद्रों को एकेवीएन में मिलाने की तैयारी कर रही है। उद्योगपति इसके विरोध में हैं। इसको लेकर उद्योग भवन में रविवार को संभागीय उद्योग संघ की बैठक हुई। इसमें एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज मप्र इंदौर द्वारा किए जा रहे विरोध का समर्थन करने का निर्णय लिया। तय किया कि उद्योग विभाग संस्थानों द्वारा शासकीय आयोजन में रतलाम की औद्योगिक इकाइयों की सहभागिता तभी होगी जब आयोजन में औद्योगिक संगठन संभागीय उद्योग संघ को सम्मिलित करेंगे। आयोजन के आमंत्रण भी केवल उद्योग संघ के माध्यम से ही दिए जाएंगे।
संभागीय उद्योग संघ अध्यक्ष संदीप व्यास एवं सचिव अरिहंत पोरवाल ने बताया उद्योगों संबंधित निर्णय में उद्योगपतियों और स्थानीय लोगों को भी महत्व देना चाहिए। किसी भी काम के पूर्व लोकल बॉडी के साथ चर्चा होगी तो बेहतर काम होंगे। बैठक में बड़ी संख्या में उद्योगपति मौजूद थे।
लघुउद्योग भारती पहले ही कर चुकी है विरोध-लघु उद्योगभारती विलय का विरोध पहले ही कर चुकी है। अध्यक्ष मंगल अग्रवाल एवं सचिव सी.पी. अवतानी ने बताया उद्योग विभाग का एकेवीएन में विलय होता है तो मुश्किलें बढ़ना तय हैं। अभी लोकल स्तर पर काम होते हैं। एकेवीएन का आॅफिस उज्जैन में है। इससे उद्योगपति उद्योग चलाएंगे कि इधर-उधर दौड़ेंगे।
महंगी हो जाएगी जमीन, देरी से होंगे काम : उद्योगपतियोंके मुताबिक एकेवीएन एक एजेंसी है। उसे इंडस्ट्रीज एरिये के डेवलपमेंट की जिम्मेदारी मिलती है तो जो जमीन अभी उद्योगपतियों को लीज पर 8 से 10 रुपए प्रति स्क्वेयर फीट मिल रही है वो 250 से 300 रुपए में मिलेगी। यह जरूरी भी नहीं कि एकेवीएन काम पूरा कर ही देगा। वर्तमान में इंडस्ट्रीज एरिये में कई ऐसे काम है जो एकेवीएन के जिम्मे हैं। सालभर बाद भी उनमें से कई अधूरे हैं। ऐसे में निर्णय लेने के पूर्व यदि उद्योगपतियों से सुझाव लिए जाएं तो काम बेहतर होंगे।