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महारुद्र यज्ञ के साथ मेला शुरू

7 वर्ष पहले
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पंच कुंडात्मक महारुद्र यज्ञ के साथ शनिवार से 11 दिनी त्रिवेणी मेला शुरू हुआ। महामंडलेश्वर स्वामी श्री स्वरूपानंद महाराज, महंत श्री गोपालदासजी, श्री अवधेशानंद जी, श्री देवस्वरूपजी, यज्ञाचार्य पं. दुर्गाशंकर ओझा सहित 21 विद्वान पंडितों के सान्निध्य में हवनकुंड में अग्निप्रवेश कराई। फिर धर्मसभा हुई। इसमें स्वरूपानंदजी ने आशीर्वचन सुनाए। त्रिवेणी तट पर अब रोज आहुतियां का दौर चलेगा। रोज रात को मेला मंच पर कार्यक्रम होंगे। समापन 23 दिसंबर को होगा।

आनंदहमारे भीतर- जबतक प्रकृति है देवासुर संग्राम चलता रहेगा। देवासुर संग्राम में सनातन धर्म के विजय होने का प्रतीक ही धर्म ध्वजा है। आनंद बाहर नहीं, हमारे भीतर है। स्वामी स्वरूपानंद महाराज ने धर्मसभा में ये बात कही। मुख्य यजमान कमलादेवी गोपाल कड़ेल, सुमनदेवी कोमलसिंह राठौर, श्यामादेवी बाबूलाल सोनी, कविता शैलेंद्र ओझा, वैष्णव देवी रमेश पाटीदार हैं। सनातन धर्म सभा एवं महारुद्र यज्ञ समिति अध्यक्ष कोमलसिंह राठौर ने महारुद्र समिति स्थापित करने वाले सभी स्वर्गवासियों का स्मरण कर उन्हें प्रेरणास्रोत बताया। स्वागत उपाध्यक्ष चैतन्य कुमार झालानी, रामचंद्र शर्मा, लालचंद टांक, आशा उपाध्याय, राजेश दवे, रमेश व्यास, नवनीत सोनी आदि ने किया। संचालन पुष्पेंद्र जोशी ने किया और आभार प्रेम उपाध्याय ने माना।

निराश्रितोंके लिए भोजन-ब्रह्मलीन संतश्री रामचंद्रजी डोंगरे महाराज की सदप्रेरणा से संचालित श्री बद्रीनारायण सेवा ट्रस्ट द्वारा 61 वें महारुद्र यज्ञ पर प्रतिदिन सुबह 11 बजे निराश्रित भोजन होगा। शुभारंभ संतों ने भोजन परोस कर किया।

मेलेमें आज क्या-रविवार कोभजन निशा होगी। इसमें कलाकार नाटक की प्रस्तुति देंगे।

हवन कुंड में अग्निप्रवेश करते स्वामी स्वरूपानंद महाराज अन्य।

पंचकुंडात्मक यज्ञ में रोज देंगे आहुतियां, 23 को होगा समापन

त्रिवेणी मेला