रतलाम । जिला अस्पताल में डिप्टी डायरेक्टर निरीक्षण कर लें या कोई अन्य बड़ा अफसर फरमान जारी कर दे, यहां के स्टाफ को इसकी कतई परवाह नहीं है। महिला प्रसूति गृह की व्यवस्थाएं तो बेकाबू हो चुकी हैं। दो दिन पहले जिस महिला के गर्भ में बच्चे की मौत को लेकर हंगामा हुआ था उसे बुधवार को भी तकलीफ झेलना पड़ी। स्टाफ ने सिर्फ उसका इलाज करने से मना कर दिया। इतना ही नहीं उसे यह कहते हुए प्रसूति कक्ष से बाहर दिया कि जान जाती हो चली जाए, बाहर निकलो। परिजन के हंगामा करने पर उपचार दिया। अन्य युवती को भी परेशानी झेलना पड़ रही है।
केस 1
सिविल सर्जन से कहा तब मिला इलाज : राजीव नगर निवासी अनीता पति बलराम के गर्भ में बच्चे की मौत हो गई थी। 22 सितंबर को वह इंदौर से प्रसूति के बाद रतलाम लौटी। मंगलवार को फिर उसकी तबीयत बिगड़ी तो परिजन उसे जिला अस्पताल लाए। दवाइयां देकर यहां से उसे रवाना कर दिया। तकलीफ होने पर बुधवार को फिर अस्पताल लाना पड़ा। प्रसूति गृह में उपचार से मना कर दिया। बलराम ने बताया पर्चा लेकर अनीता को प्रसूतिगृह ले जाने लगे तो कर्मचारियों ने बाहर निकाल दिया। कहा- जान जाती है तो चली जाए पर बाहर जाओ। मामला सिविल सर्जन तक पहुंचा तब दोपहर बाद उपचार दिया गया।
केस 2- भर्ती नहीं किया, दवाई देकर टरका दिया : बाजना ब्लॉक के सुंदरेल निवासी प्रकाश देवदा 17 वर्षीय बेटी अनीता को मंगलवार को जिला अस्पताल लाए थे। तकलीफ ज्यादा होने के बावजूद उसे भर्ती करते हुए दवाई देकर टरका दिया है। दवाई लेने से फर्क नहीं पड़ा तो बुधवार को फिर अस्पताल पहुंचे। डॉक्टर ने उन्हें सोनोग्राफी जांच लिखी। परिजन काफी देर तक सोनोग्राफी कक्ष ढूंढते रहे। इतनी देर कराहती रही। प्रकाश का कहना है कि अस्पताल में सोनोग्राफी नहीं हो रही। इतने रुपए भी नहीं है कि बाहर जांच करवा लें। सोनोग्राफी नहीं होने तक कोई इलाज करने को तैयार नहीं है। दो दिन से परेशान हो रहे हैं।
अव्यवस्थाएं : - प्रसूति के लिए आने वाली महिलाओं की कोई सुध नहीं लेता।
- अधिकांश मरीजों को सोनोग्राफी जांच लिखी जाती है जबकि अस्पताल की मशीन खराब है।
- मरीजों को भर्ती करने के बजाय दवा लिखकर चलता कर दिया जाता है।
- पर्चा बनवाने के लिए पुलिस चौकी के पास जाना पड़ता है, जबकि प्रसूति वार्ड के पास व्यवस्था होना चाहिए।
व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए : ''इंदौर रैफर की गई महिला बुधवार को जिला अस्पताल आई थी। दोपहर बाद उसे उपचार मिल गया। उसे भर्ती करने की जरूरत नहीं थी। पेट दर्द से परेशान युवती को भी उपचार दिया गया। व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए हैं।” डॉ.आनंद चंदेलकर, सिविलसर्जन।
डॉ. बोरीवाल व डॉ. सिंह को नोटिस: रतलाम। गर्भस्थशिशु की मौत महिला के इलाज में लापरवाही के मामले में डॉ. डी.सी. बोरीवाल डॉ. मंजू सिंह को शोकॉज नोटिस जारी होंगे। सीएमएचओ डॉ. पुष्पेंद्र शर्मा ने बताया राजीव नगर की अनीता पति बलराम बैरागी को प्रसव के लिए दाखिल कराया था। इलाज डॉ. मंजू सिंह कर रही थी। 19 सितंबर को गर्भस्थ शिशु की मौत का हवाला देकर उन्होंने महिला को इंदौर रैफर कर दिया। अनीता की सोनोग्राफी हाट रोड स्थित गौरव डॉयग्नोस्टिक सेंटर में हुई। संचालक डॉ. बोरीवाल ने रिपोर्ट में गड़बड़ी की। डॉ. सिंह ने रिपोर्ट पर ध्यान नहीं दिया और अनीता को ब्लड चढ़ाने की सलाह दी। केस शीट में लापरवाही उजागर होने पर दोनों नोटिस जारी किए जाएंगे।
टायपिस्टकी गलती : ''सोनोग्राफी रिपोर्ट में टायपिस्ट से गलती हुई। नोटिस मिलेगा तो जवाब देंगे।” डॉ.डी.सी. बोरीवाल
ब्लड कम था, इसलिए चढ़ाया : ''18सितंबर की सोनोग्राफी रिपोर्ट में शिशु जीवित था। ब्लड कम होने पर महिला को ब्लड चढ़ाने की सलाह दी थी। अगले दिन शिशु की डेथ की जानकारी मिली। नॉर्मल डिलेवरी की खातिर ब्लड चढ़ाना जरूरी था। नोटिस मिलेगा तो जवाब दूंगी।”- डॉ.मंजू सिंह।