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भक्त और भगवान का भी दूध और पानी जैसा ही संबंध : प्रशांतरत्नजी

4 वर्ष पहले
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रतलाम | प्रभु भक्ति हमारी आत्मा का उत्सव है। प्रभु की भक्ति यानी प्रभु से एकमयता-तन्मयता। भगवान की भक्ति करते-करते भक्त क्षीर-नीर की तरह एक हो जाता है। दूध और पानी दोनों भिन्न दृव्य हैं परंतु ये दोनों जब एक साथ मिल जाते हैं तब एक रस हो जाते हैं। उसी प्रकार भक्त और भगवान का भी दूध और पानी जैसा संबंध है। यह बात प्रशांतर| विजयजी ने आराधना भवन उपाश्रय में कही। उन्होंने कहा भक्त और भगवान के साथ एकमेकता का संबंध जोड़ने के लिए परम आलंबन कोई हो तो वह भक्ति है। दुनिया से नाता तोड़ो और प्रभु से नाता जोड़ो। यही भक्ति का सार है। विजयकुमार लुनिया ने बताया 15 जुलाई को टाटानगर स्थित जैन मंदिर में प्रभु भक्ति उत्सव होगा।

आराधना भवन में प्रवचन का लाभ लेते श्रद्धालु।

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