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मनुष्य की देह से ही साधना संभव है, अन्यथा यह जन्म निरर्थक है

4 वर्ष पहले
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मनुष्य जन्म पाना बहुत दुर्लभ है। जिन वाणी और सच्चे धर्म को सुन पाना मुश्किल और उस पर श्रद्धा रखना व आचरण करना उससे भी ज्यादा मुश्किल होता है। आत्म कल्याण के लिए चार दुर्लभ अवसर हमें मिले हैं। इन चार दुर्लभ अवसर के बिना संसार से मुक्त होना असंभव है।

यह बात निपुणप्रभाजी ने नीमचौक स्थानक में कही। उन्होंने कहा मनुष्य की देह से ही साधना संभव है। मनुष्य धर्म पाकर भी जो धर्म शास्त्रों का श्रवण नहीं कर पाता, धर्म श्रवण करके भी जो मानव धर्म का श्रद्धापूर्वक आचरण नहीं कर पाता, उसका मनुष्य जन्म पाना भी निरर्थक हो जाता है। इन चारों भव की प्राप्ति से आत्मा परमात्मा पद पा लेती है। मनुष्य का महत्व नहीं है, मानवता का महत्व है। आज चारों ओर हिंसा व्याप्त है। मानव शरीर मिट्टी के ढेले के समान है, उसका उतना उपयोग नहीं है, लेकिन उस मिट्टी से यदि कोई पात्र बना दिए जाए तो वह उपयोगी हो जाता है। उन्होंने कहा जिस मनुष्य में मानवता होती है, उसको मनुष्य तो क्या देवता भी नमस्कार करते हैं। वह शरीर का नहीं मानवता को नमस्कार है। जिस मनुष्य में मानवता नहीं होती, उस मनुष्य का कोई महत्व नहीं है। अधिकांश मनुष्य सांसारिक काम भोगों के दलदल में फंसकर इन परम दुर्लभ अंगों को पाने के अवसर खो देते हैं। वे पुनः संसार रूपी महासमुद्र में गोते खाते रहते हैं। अतः इन चारों अंगों की दुर्लभता समझकर इन्हें जीवन में उतारकर शाश्वत सुख रूपी मोक्ष मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए। महासती इंदुप्रभाजी ने मांगलिक श्रवण करवाई। संघ अध्यक्ष ललित पटवा ने बताया शुक्रवार को गुणवंत मालवी एवं अमित कटारिया ने 7 उपवास की प्रतिज्ञा ली। साथ ही आयंबिल, एकासन एवं सामयिक की लड़ी चल रही है। संघ के कोषाध्यक्ष अमृत कटारिया ने बताया महासती के सान्निध्य में सुबह 9 से 10 बजे बड़ी साधु वंदना के जाप का आयोजन होगा। संचालन संघ के महामंत्री विनोद बाफना ने किया।

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