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सहायक आयुक्त आदिवासी गुप्ता भी रिश्वत मामले में आरोपी

6 वर्ष पहले
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आदिवासी विकास विभाग के चर्चित रिश्वत मामले में हाईकोर्ट के निर्देश पर सहायक आयुक्त मधु गुप्ता को भी अभियुक्त बनाया है। भ्रष्टाचार मामलों के विशेष न्यायाधीश एम.एस. चंद्रावत ने बुधवार को आदेश पारित कर अभियोजन को सहायक आयुक्त मधु गुप्ता के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति प्राप्त कर न्यायालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। मधु गुप्ता वर्तमान में होशंगाबाद में पदस्थ हैं। गजेंद्र कुमार ररोतिया ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आदिवासी विकास कार्यालय में आवेदन दिया था। तत्कालीन सहायक आयुक्त मधु गुप्ता ने अधीनस्थ बाबू रामलाल मालवीय के माध्यम से 15 हजार रुपए रिश्वत मांगी। गजेंद्रकुमार की शिकायत पर लोकायुक्त पुलिस ने 24 अगस्त 2013 को रामलाल को पांच हजार रुपए रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। लोकायुक्त पुलिस ने बाबू के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर न्यायालय में चालान पेश किया। 18 नवंबर 2014 को फरियादी गजेंद्र ने न्यायालय में अपील कर मधु गुप्ता को भी आरोपी बनाने का निवेदन किया। 6 दिसंबर 2014 को विशेष न्यायालय ने आवेदन निरस्त कर दिया। फैसले के खिलाफ फरियादी गजेंद्र ने हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में पुनरीक्षण याचिका प्रस्तुत की। उच्च न्यायालय ने विशेष न्यायालय के निर्णय को अपास्त कर उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रतिपादित न्याय दृष्टांत के आधार पर आवेदन का निराकरण करने के आदेश दिए थे। उपसंचालक अभियोजन एस.के. जैन ने बताया विशेष न्यायाधीश चंद्रावत ने हाईकोर्ट द्वारा प्रतिपादित न्याय दृष्टांत के परिप्रेक्ष्य में सहायक आयुक्त के खिलाफ कार्यवाही करना उचित माना। लोक सेवक होने से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत उनके खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति के बिना संज्ञान नहीं लिया जा सकता, इसलिए कोर्ट ने अभियोजन को गुप्ता के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति प्राप्त कर न्यायालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

अनुकंपा नियुक्ति के लिए मांगी थी रिश्वत
फरियादी गजेंद्र कुमार ररोतिया ने सहायक आयुक्त आदिवासी विकास कार्यालय में अपने पिता के स्थान पर अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन दिया था। सहायक आयुक्त मधु गुप्ता ने अपने अधीनस्थ बाबू रामलाल मालवीय के माध्यम से 15 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी। लोकायुक्त पुलिस ने गजेंद्र कुमार की शिकायत पर 24 अगस्त 2013 को बाबू रामलाल मालवीय को 5 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया था। लोकायुक्त पुलिस द्वारा केवल बाबू के खिलाफ ही प्रकरण दर्ज कर न्यायालय में चालान पेश किया गया। इससे असंतुष्ट होकर फरियादी ने सहायक आयुक्त को अभियुक्त बनाने के लिए न्यायालय का द्वार खटखटाया था।