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जेवर के लिए गांव के लोग कहां से लाएंगे पैनकार्ड

5 वर्ष पहले
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पैनकार्ड की अनिवार्यता के खिलाफ बुधवार को सराफा बाजार बंद रहा। व्यापारियों ने धरना दिया और पैनकार्ड की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की। जल्द मांगें नहीं मानने पर आंदोलन की चेतावनी दी।

दो लाख रुपए या उससे अधिक की ज्वैलरी की खरीदी पर केंद्र ने पैनकार्ड अनिवार्य कर दिया है। इसका व्यापारी विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है बाजार में खरीदी के लिए ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के साथ महिलाएं आती हैं। महिलाएं कहां से पैनकार्ड लाएंगी। पैनकार्ड की प्रामाणिकता के लिए ज्वैलर्स जिम्मेदार रहेंगे जो गलत है। इससे कारोबार पूरी तरह ठप हो जाएगा।

(मप्र सराफा एसोसिएशन के कार्यकारी अध्यक्ष झमक भरगट के अनुसार)

10 लाख से ऊपर खरीदी पर लागू हो नियम : व्यापारी

पैनकार्ड की सीमा 10 लाख रुपए की जाए।

पैनकार्ड की प्रामाणिकता के लिए ज्वैलर्स जिम्मेदार है जो गलत है।

सराफा बाजार का कारोबार ग्रामीणों पर निर्भर है। अधिकांश ग्रामीणों के पास पैनकार्ड नहीं है।

पैनकार्ड की अनिवार्यता से गैर कानूनी रूप से व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। इससे सरकार के राजस्व को बहुत नुकसान होगा और अनधिकृत रूप से व्यापार बढ़ेगा।

छोटे और मीडियम कारोबारी पर दबाव बनेगा। इंस्पेक्टर राज पुन: कायम होगा।

व्यापार करने की स्वतंत्रता समाप्त होगी।

देश में 86 फीसदी लोगों के पास पैनकार्ड नहीं है।

पैनकार्ड की अनिवार्यता के िवरोध में देशव्यापी प्रदर्शन के तहत बुधवार को रतलाम का सराफा बाजार भी बंद रहा और व्यापारी धरने पर बैठे। एक दिन की हड़ताल से करीब 3 करोड़ रुपए का कारोबार प्रभावित हुआ।

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