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खेती में जोखिम उठाने की आदत ने बना दिया एग्रो टूरिज्म विलेज

5 वर्ष पहले
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ये तितरी है। एग्रो टूरिज्म विलेज। यह तमगा मिला है यहां के किसानों की खेती में जोखिम उठाने की आदत की वजह से। जब दूसरे गांवों के किसान परंपरागत खेती के दायरे में ही बंधे थे, यहां के किसानों ने न केवल अंगूर की खेती के बारे में सोचा बल्कि अंगूर से वाइन बनाने की फैक्टरी भी खोल दी। बीते वर्षों में कई कारणों से भले ही यहां अंगूर की पैदावार कम हुई लेकिन यह गांव आज भी कृषि पर्यटन का केंद्र बना हुआ है। यही वजह है कि यहां आपको खेती के जानकारों से लेकर विदेशी सैलानी भी आते-जाते दिख जाएंगे।

रतलाम से झाबुआ की ओर छह किलोमीटर का सफर तय करने के बाद तितरी गांव में अंगूर व स्ट्रॉबेरी से लदे खेत नजर आ जाएंगे। दो हजार की आबादी वाले इस आदिवासी बहुल गांव की अर्थव्यवस्था पाटीदारों के 70 घरों पर केंद्रित है। 80 के दशक तक तितरी भी परंपरागत खेती तक सीमित था। इसी दौर में पाटीदार समाज के किसानों ने नया करने की ठानी। लक्ष्मीनारायण पाटीदार ने 1982 में टेबल ग्रैप्स (खाने के अंगूर) की खेती शुरू की। इस जोखिम ने तितरी को मध्यप्रदेश का पहला अंगूर उत्पादक गांव बना दिया। खेती की नई तकनीकी की जानकारी लेने इजराइल सहित अन्य कई देशों की यात्राएं कर चुके लक्ष्मीनारायण पाटीदार ऐसे अंगूर की पैदावार भी कर चुके हैं जिसमें आम का स्वाद आता है। तितरी के किसानों ने फसल की मार्केटिंग का अपना अलग ही सिस्टम विकसित किया है। फल-सब्जी उत्पादक समिति इसका संचालन करती है। तीन दर्जन सदस्यों वाली समिति के माध्यम से हर किसान अपनी उपज देशभर की बड़ी मंडियों में भेज सकता है। यहां के किसान हाईब्रिड और रिज्ड खेती की बदौलत देशभर की प्रमुख बड़ी मंडियों में टमाटर, मटर, स्ट्रॉबेरी, अंगूर, अदरक सहित कई उपज भेज रहे हैं। अब यहां एप्पल बेर की खेती भी हो रही है। समिति के अध्यक्ष जमनालाल पाटीदार कहते हैं उपज का जो भाव चार बीघा वाले किसान को मिलता है वही 80 बीघा वाले को मिलता है। खेती को लेकर किसान कितने संजीदा हैं यह किसान मोतीलाल पाटीदार को देखकर लगाया जा सकता है। महज पांचवीं तक पढ़े मोतीलाल जब माइक्रो न्यूट्रीन्स पर बात करते हैं तो कृषि विशेषज्ञ भी अवाक रह जाते हैं। ये वही किसान हैं जिन्होंने न सिर्फ प्रदेश की पहली वाइनरी स्थापित कर दी, प्रदेश सरकार को वाइनरी पॉलिसी बनाने के लिए भी बाध्य कर दिया। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से वाइन उत्पादन की डिग्री लेने वाले युवा किसान जितेंद्र पाटीदार कहते हैं यहां के लोगों ने रिस्क ली और कुछ नया करने के बारे में सोचा। वे सफल भी हुए। इस सफलता से समृद्धि और फिर सामाजिक बदलाव भी आया। गांव में 17 कारें (विभिन्न सेगमेंट की) हैं। जितेंद्र कहते हैं- खेती में नए प्रयोग देखने हों तो एक बार तितरी जरूर आएं।

चलो, गांव चलें
तितरी, जिला रतलाम

तितरी में अंगूर की खेती देखते विदेशी पर्यटक।

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