कलेक्टर से बोले अधिकारी- हम क्या करें, कोई काम ही नहीं करना चाहता
स्व सहायता समूह को नहीं मिला मानदेय, दो को नोटिस
एक दिन पहले ही सोमवार को कलेक्टर ने एक बैठक में अधिकारियों से कहा था कि काम नहीं करना है तो यहां बैठकर क्या करेंगे। मंगलवार को टाइम िलमिट की बैठक में अफसरों ने लाचारी जताई और कहा हम क्या करें, कोई काम ही नहीं करना चाहता। अफसरों का यह जवाब तीन विभागों की समीक्षा में सामने आया। ये विभाग थे शिक्षा, स्वास्थ्य और आरटीओ।
अधिकारियों की विवशता पर कलेक्टर को फैसले लेने पड़े। स्वास्थ्य विभाग के लिए यह तक तय किया गया कि अमले की मॉनीटरिंग अब राजस्व के अधिकारी करेंगे। कलेक्टर बी. चंद्रशेखर का कहना है हमारा काम ही हैं, अधिकािरयों से काम कराना। यदि कोई अिधकारी ठीक से काम नहीं कर पा रहा है तो ऐसी स्थिति में किसी दूसरी व्यवस्था का इंतजाम करना होता है। यदि फिर भी व्यवस्था ना सुधरे तो कार्रवाई करना होती है।
परिवहन : आरटीओ से मांगी एजेंटों की सूची
परिवहन विभाग और बस स्टैंड पर एजेंट प्रथा बंद करने के लिए कलेक्टर 4 टीएल बैठकों से निर्देश दे रहे हैं। लोक परिवहन वाहनों के ड्राइवर्स की वर्दी, नेम प्लेट का पालन कराने के भी निर्देश पहले से दिए हुए हैं। मंगलवार को फिर इन मामलों में आरटीओ विवेक दाते से जवाब मांगा। दाते का कहना था- सर एजेंट व्यवस्था खत्म करने के लिए प्रयास तो किए लेकिन पूरी तरह समाप्त नहीं कर सका। कलेक्टर ने कहा- अब हर सप्ताह आपके द्वारा की कार्रवाई की समीक्षा होगी। आरटीओ कार्यालय के एजेंट की सूची प्रशासन को उपलब्ध कराएं, कार्रवाई करेंगे। कलेक्टर ने एसडीएम को बसों व अन्य वाहनों की जांच के निर्देश दिए।
शिक्षा : ताल प्राचार्य को शोकॉज नोटिस जारी होगा
ताल विकासखंड के नेगरून में मध्याह्न भोजन वितरण में अजा विद्यार्थियों के साथ पक्षपात की जांच करने के लिए कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी अनिल वर्मा को जिम्मेदारी दी थी। वर्मा ने ताल प्राचार्य से जांच कराई। रिपोर्ट में शिकायत को झूठा बता दिया। कलेक्टर ने टीएल में वर्मा से जवाब मांगा तो उन्होंने जांच रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी। कलेक्टर ने कहा- मैं नेगरून गया था। मेरे सामने बच्चों ने शिकायत की, उसे भी झूठा बता दिया। वर्मा ने कहा- मैं क्या कर सकता हूं। कलेक्टर ने ताल प्राचार्य को शोकॉज नोटिस देने के निर्देश दिए।
स्वास्थ्य : राजस्व विभाग सत्यापित करेगा रिपोर्ट
कलेक्टर ने सीएमएचओ डॉ. वंदना खरे से पूछा अब तक कितने कर्मचारियों ने पदस्थापना की जगह रहना शुरू कर दिया है। सीएमएचओ का जवाब था- सर, एएनएम, बहुउद्देश्यीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता व मैदानी अमले के लिए बीएमओ ने उपस्थिति का प्रमाणीकरण दिया है। इसके बाद भी पदस्थापना की जगह उपस्थिति नहीं मिल रही। बीएमओ के प्रमाणीकरण भी झूठे निकले। कलेक्टर ने तय किया कि अब से राजस्व विभाग के अधिकारी स्वास्थ्य अमले का सत्यापन करेंगे। बीएमओ की रिपोर्ट भी एसडीएम सत्यापित करेंगे।