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इंदौर से उदयपुर तक चमकाया रतलाम का नाम

6 वर्ष पहले
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उनके मस्तमौला अंदाज का हर कोई कायल था

मेरे भाई की पड़ोस में दुकान थी। रोज उनसे राम-श्याम होती थी। शुक्रवार शाम 5 बजे भाई पारस आया और बताया मनोहरलालजी को अटैक गया। वे नहीं रहे तो विश्वास ही नहीं हुआ। विश्वास हो भी तो भला कैसे सालों से हम साथ रहे और साथ-साथ कारोबार किया। वे सामाजिक क्षेत्र में जितने सक्रिय थे उससे ज्यादा कारोबार के प्रति समर्पित थे। इसकी बदौलत डीपी ज्वैलर्स के नाम से रतलाम तक सीमित कारोबार को इंदौर और फिर उदयपुर तक फैलाया। दोनों शहरों में रतलाम के शुद्ध सोने का डंका बज रहा है। वे भाई अनोखीलाल की तरह समाजसेवा में सक्रिय होने के साथ पिता पन्नालाल कटारिया की तरह रोज वृद्धाश्रम जाते थे। आधी रात को भी उनके यहां कोई वृद्ध चला जाए तो वे उसकी सेवा से पीछे नहीं हटते थे। वे आचार्य रामलालजी के भक्त थे। वे भले आज हमारे बीच में नहीं हैं लेकिन हमेशा हमारे दिलों में बने रहेंगे। कटारिया पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके पुत्र है राजेश, अनिल और संजय कटारिया। मनोहरलाल कटारिया के दादाजी धूलचंद कटारिया ने 75 साल पहले चांदनी चौक में ज्वैलरी शॉप शुरू की थी। उनकी विरासत को मनोहरलालजी ने निरंतर आगे बढ़ाया। वे समाज की धार्मिक संस्थाओं से जुड़कर धर्म की सेवा में पूरे समय लगे रहे। उम्र में मुझसे भले 8-9 साल बड़े थे लेकिन कभी इसका अहसास नहीं हुआ।

झमकभरगट, अध्यक्षसराफा एसोसिएशन

मनोहरलाल कटारिया

िशवकुमार झालानी

स्मृति शेष

स्मृति शेष