सरकार ने नहीं सुनी तो ग्रामीणों ने ही गहरी कर दी नदी
पानी की कमी से जूझ रहे किसानों ने नदी में स्टॉप डेम बनाने के लिए शासन-प्रशासन से कई बार गुहार लगाई लेकिन किसी ने नहीं सुनी तो ग्रामीणों ने खुद ही नदी में खुदाई शुरू कर दी। शुरुआत एक किसान ने अपने खेत के नजदीक से की। फिर दूसरे किसान आगे आए। एक-एक किलोमीटर के अंतर से चार किमी में 6 फीट तक नदी का गहरीकरण किया। इसका असर हुआ। नदी का जो हिस्सा नवंबर में पूरी तरह सूख जाता था, वहां फरवरी में भी पानी दिखा। कुएं, ट्यूबवेल भी ज्यादा साथ देने लगे।
यह कहानी है सैलाना तहसील के ग्राम बोदीना के किसानों की। जिस नदी को गहरा किया वह है मलेनी। गहरीकरण के लिए जहां लोगों ने पसीना बहाया वह स्थान नदी के उदगम स्थल से चार किमी दूर है। इस वजह से यहां नदी का स्वरूप नाले जैसा है। कहानी कुछ यूं शुरू होती है- बोदीना के किसान भागीरथ पाटीदार ने तीस बीघा जमीन में सिंचाई के लिए सात ट्यूबवेल खुदवाए लेकिन एक भी पानी की कमी पूर्ति नहीं कर पाया। यहां 600 से 700 फीट की गहराई पर पानी मिला, वह भी कम। एक कुआं भी खुदवाया जो सूखा ही रहता था। फिर उन्होंने खेत के करीब से गुजरती मलेनी नदी में 2 लाख की लागत व ग्रामीणों की मदद से गहरीकरण का काम शुरू किया। 20 दिन लगातार काम चला। दूसरे किसान भी इस मुहिम से जुड़े।
फसलें लहलहाने लगीं
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10 साल से कर रहे स्टॉप डेम की मांग
नदी के उदगम स्थल से करीब 10 - 12 किलोमीटर तक एक भी स्टॉपडेम नहीं है। जन अभियान परिषद और नवांकुर समिति के सचिव हरिदास बैरागी ने बताया हम 10 साल से स्टॉपडेम की मांग कर रहे हैं पर इस ओर न सरकार ध्यान दे रही, न जनप्रतिनिधि। हम चाहते हैं कि यहां दो - तीन स्टॉप डेम बनाए जाएं। इससे क्षेत्र में वाटर लेवल बढ़ जाएगा। नदी के गहरीकरण में हमारी संस्था ने भी किसानों का सहयोग किया।
भागीरथ पाटीदार के पुत्र कन्हैयालाल पाटीदार ने बताया नदी नवंबर-दिसंबर में पूरी तरह सूख जाती थी। गहरीकरण के बाद फरवरी में थोड़ा पानी बाकी है। हमें खेती के लिए नवंबर से फरवरी तक पानी की ज्यादा जरूरत होती है। गर्मी में फिर गहरीकरण करेंगे। पाटीदार के खेत के आसपास के किसानों को भी फायदा हुआ है। लक्ष्मण हयरी 3 बीघा जमीन में किसानी कर गुजर करते हैं। उन्हें भी इसका फायदा भी मिला। अंबालाल पाटीदार का खेत नदी के उस पार है। इनके ट्यूबवेल में पानी बढ़ गया। अंबालाल कहते हैं इस समय तक नदी में पहले कभी पानी नहीं देखा था। जितने खर्च में बोरिंग होता है उतने में नदी का गहरीकरण हो गया। बोरी बंधान से पानी रोकने की कोशिशें की थी पर यह तरीका ज्यादा कारगर साबित हुआ है।
1. बोदीना से गुजरती मलेनी नदी में गहरीकरण के बाद फरवरी में भी भरा पानी।
2. नदी गहरीकरण के बाद हुई सिंचाई से प्याज की फसल अच्छी हुई।
भास्कर खास