रतलाम। रतलाम में ऐसे गुलाब भी हो रहे हैं जो महकते भले ही नहीं लेकिन 8 दिन तक मुरझाते नहीं हैं। वैलेंटाइन डे के चलते इन गुलाब की डिमांड बढ़ गई है और रतलाम के साथ जयपुर, सूरत में खूब डिमांड है।
ये है डच गुलाब। इटावा माताजी, तीतरी और सिमलावदा आदि स्थानों में इस गुलाब की खेती हो रही है। डंडी वाले ये गुलाब देशी गुलाब से बिल्कुल अलग है। इनमें खुशबू नहीं है लेकिन लंबे समय तक ताजे रहते हैं। वैलेंटाइन डे के चलते भाव भी बढ़ गए हैं। आम दिनों में यह गुलाब 8 से 10 रुपए में बिकता है। वहीं अब 15 से 20 रुपए में यह बिक रहा है।
सामान्य गुलाब की तुलना में दिखने में ज्यादा खूबसूरत
पहले रतलाम में डच गुलाब नासिक, सूरत, राजकोट आदि स्थानों से आते थे। लेकिन अब रतलाम में ही इसकी खेती हो रही है। जिले में एक हेक्टेयर क्षेत्र में डच गुलाब की खेती हो रही है। इससे ये गुलाब तो बाहर तो जा रहे हैं। साथ ही लोकल में भी इनकी अच्छी डिमांड है।
ये है खासियत
साधारण गुलाब के मुकाबले दिखने में ज्यादा खूबसूरत।
8 दिन तक नहीं मुरझाता।
पत्ती आसानी से नहीं खिरना।
पॉली हाउस में कुछ ऐसे खिल रहे हैं गुलाब।
डच गुलाब की खेती के लिए मिल चुका प्रथम पुरस्कार
डच गुलाब की खेती की शुरुआत एक साल पहले अजीत देव ने की थी। इटावा माताजी में पॉली हाउस में उन्होंने ये गुलाब लगाए हैं। इसके बाद अब अन्य किसान भी डच गुलाब की खेती करने लगे हैं। अजीत देव को डच गुलाब की खेती के लिए डेढ़ महीने पहले पचमढ़ी में हुए फ्लावर एग्जीबिशन में प्रदेश में प्रथम पुरस्कार भी मिल चुका है। देव ने बताया एक बीघा में 20 हजार गुलाब के पौधे लगते हैं। तीन महीने बाद फसल आना शुरू होती है और 1500 फूल रोजाना निकलते हैं। पांच साल तक फूल आते हैं।
डच गुलाब की खेती का चलन बढ़ रहा है
रतलाम में अभी तक देशी गुलाब की खेती होती रही है। लेकिन अब डच गुलाब की खेती होना भी शुरू हो गई है। एक साल पहले इसकी शुरुआत हुई थी। अब एक हेक्टेयर में गुलाब की खेती होने लगी है। पहले बाहर से पौधे आते थे। अब रतलाम से बाहर जाने लगे हैं। एस. पी. शर्मा, कृषि उद्यानिकी विस्तार अधिकारी।