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व्यापमं फर्जीवाड़े से बढ़ाई न्यायधीशों की जानकारी

7 वर्ष पहले
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सागर। राज्य न्यायलयिक विज्ञान प्रयोगशाला में आयोजित विशेष प्रशिक्षण सत्र में जजों के लिए पीएमटी का फर्जीवाड़ा एक अहम सबक साबित हुआ। सोमवार को इस विशेष प्रशिक्षण सत्र के आखिरी दिन यहां के वैज्ञानिकों ने न्यायधीशों को बताया कि किस तरह दो छात्रों की फोटो में मिक्सिंग कर पीएमटी दिलाई गई लेकिन जैसे ही इस मामले की जांच एफएसएल सागर में की गई तो उनकी यह गड़बड़ी पकड़ में गई। न्याययिक अधिकारी प्रशिक्षण संस्थान जबलपुर एवं एफएसएल सागर के संयुक्त तत्वावधान में यहां तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया था।
फोटो मार्फिंग की बारीकियों को बताया : सत्र के दौरान वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी एवं फोरेन्सिक फोटो फेशियल विशेषज्ञ राज श्रीवास्तव केसी शर्मा ने जजों को बताया कि किसी भी व्यक्ति के फोटो का मिलान उसके चेहरे पर अलग-अलग हिस्सों का वैज्ञानिक रूप से माप लेकर किया जाता है। इस काम में कई बार दिक्कत तब आती है, जब छात्र अपना पुराना फोटो लगा देते हैं। हालांकि छात्र का वर्तमान फोटो मिलने पर उसके बारे में लगभग 99 प्रतिशत सही रिजल्ट हासिल किया जा सकता है। इस दौरान दोनों वैज्ञानिकों ने जजों को फटो को मिलाने की विभिन्न पद्धतियों को बारे में बताया।
वैज्ञानिक श्रीवासतव ने बताया कि राज्य की इस लैब ने देश में फोटो मार्फिंग के सबसे ज्यादा प्रकरण हैंडल किए हैं, जिनमें सटीक अभिमत भी दिया गया।

कार के भीतर फांसी लगाकर आत्महत्या के बारे में बताया : प्रशिक्षणसत्र में शामिल इंदौर स्थित क्षेत्रीय प्रयोगशाला के वरिष्ठ अपराध घटनास्थल विशेषज्ञ डाॅ. सुधीरकांत शर्मा ने जजों को अलग अलग अपराध के घटनास्थल की वैज्ञानिक विवेचना को रोचक अंदाज में बताया। उन्होंने एक कार के अन्दर सीट बेल्ट का उपयोग कर लगाई गई फाॅसी के प्रकरण का उल्लेख किया। यह पुलिस अन्वेषकों के लिए एक पहेली बन गया था। पहली नजर में सारे साक्ष्य इस बात का इशारा कर रहे थे कि किसी ने सीट बेल्ट से गला घोंट कर उस व्यक्ति की हत्या की है। डाॅ. शर्मा ने बताया कि मैंने घटनास्थल और शव की सूक्ष्म वैज्ञानिक विवेचना की। इसमें विभिन्न तथ्यों और साक्ष्यों को शामिल करते हुए यह सिद़्ध किया कि यह कार के भीतर फांसी लगाकर आत्महत्या करने का अनूठा मामला है। अगले विशेषज्ञ के रूप में विवि के क्रिमिनोलॉजी विभाग के प्रो. जेडी शर्मा ने नारको टेस्ट की बारीकियों के बारे मेें बताया।

डीजेने प्रशिक्षण को बहुत उपयोगी बताया : प्रशिक्षणके आखिर में अपने अध्यक्षीय उद्धोधन में जिला एवं सत्र न्यायाधीश एचपी सिंह ने कहा कि जजों के लिए यह प्रशिक्षण सत्र बहुत मददगार होगा। उन्हें किसी भी मामले को वैज्ञानिक ढंग से समझने में सहायता मिलेगी, जिसका लाभ फरियादी को मिलेगा। इसके बाद कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं मप्र पुलिस के एडीजी राजीव टंडन ने सभी प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया।
एफएसएल का प्रशिक्षण कार्यक्रम तीसरा दिन : 68 प्रतिशत मामलों में आरोपी को सजा मिली
एफएसएल के दौरे पर आए राज्य पुलिस के एडीजी टंडन ने दी जानकारी
सागर| सनसनीखेजमामलों में राज्य की पुलिस ने विशेष सफलता प्राप्त की है। इस वर्ष के प्रकरणों में से 68 प्रतिशत में न्यायालय ने संबंधित आरोपी को अपराधी मानकर सजा दी है।
अपराध प्रमाणित होने के मामले में यह आंकड़ा इसलिए भी खास है क्योंकि अन्य सामान्य अपराधों में से पुलिस केवल 22 प्रतिशत मामलों में ही आरोपियों को ही सजा दिला पाती है। यह जानकारी राज्य के एडीजी राजीव टंडन (सीआईडी) ने 'दैनिक भास्कर' से विशेष चर्चा में दी। एडीजी टंडन यहां के राज्य एफएसएल में न्यायिक अधिकारियों के लिए फोरेन्सिक लैब की कार्यप्रणाली बताने के लिए आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम के समापन सत्र में शामिल होने आए थे।

प्रत्येक जिले से 5-5 अपराध छांटे गए थे : एडीजी टंडन के अनुसार हमारे महकमे ने प्रत्येक जिले से 5-5 सनसनीखेज मामले छांटे थे, जिनके साक्ष्यों को जुटाने में कोई कोर-कसर नहीं रखी गई। टंडन के मुताबिक पुलिस के लिए यह अपराध एक बड़ी चुनौती होते हैं क्योंकि अगर ऐसे आरोपी छूट जाते हैं तो अपराधों के प्रति भय खत्म होता है।

82करोड़ रुपए का प्रपोजल दिया गया है : टंडन ने बताया कि सीआईडी ने राज्य सरकार को 82 करोड़ रुपए मंजूर करने संबंधी प्रपोजल दिया है। मंजूर होने के बाद यहां के सभी लैब एवं डीएनए में नए उपकरण मंगाए जाएंगे। साथ ही उज्जैन, रीवा और जबलपुर में मंजूर हुई नई रीजनल लैब को जल्द से जल्द शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी तरह डीएनए लैब भोपाल को जल्द शुरू किया जाएगा।

डीएनएकिट उपलब्ध होगी, वैज्ञानिक भी मिलेंगे : एडीजी ने कहा कि सागर डीएनए लैब में जरूरी जांच किट्स की कमी चिंताजनक है। यह विदेशों से आयात करना पड़ती है। टंडन ने कहा कि सोमवार से भोपाल में एफएसएल वैज्ञानिकों की पीएससी के मार्फत होने वाली भर्ती के लिए इंटरव्यू शुरू हो गए हैं। इससे वैज्ञानिकों की कमी दूर होगी।
जजों को प्रशिक्षण देने में मप्र देश के अग्रणी राज्यों में शामिल : कार्यक्रम के समापन अवसर पर एसएफएसएल के निदेशक एसके तिवारी ने बताया कि मप्र उच्च न्यायालय, जबलपुर ने राज्य के समस्त न्यायायिक अधिकारियों को फोरेेंसिक साइंस से संबंधित विशिष्ट प्रशिक्षण देने की जिम्मेदारी हमारी संस्था को सौंपी थी। इसमें अब तक राज्य के विभिन्न जिलों में पदस्थ स्पेशल जज एवं एडीजे स्तर के 320 न्यायायिक अधिकारी प्रशिक्षण ले चुके हैं इस मामले में अब मप्र, गुजरात पंजाब के साथ अग्रणी राज्यों में गया है।

एफएसएल में रंगे हाथ: सागर. एफएसएल में न्यायालयीन प्रशिक्षण के दौरान सोमवार को रंगे हाथों पकड़ने का डेमो देते विशेषज्ञ।