पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • अफसरों ने दबाई चिट्‌ठी, मेयर कमिश्नर को भी नहीं पता

अफसरों ने दबाई चिट्‌ठी, मेयर कमिश्नर को भी नहीं पता

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
सागर। झील संरक्षण योजना को लेकर नगर निगम के अधिकारी किस हद तक बेपरवाह हैं, इसकी एक बानगी यह है कि 3 सितंबर को एप्को से आए पत्र को योजना शाखा के अधिकारी दबाकर बैठ गए। 10-12 दिन तक इसके संबंध में किसी से चर्चा तक नहीं की। हाल ही में इसे मेयर इन कांउसिल में चर्चा के लिए भेजा गया।
दिलचस्प बात यह रही कि एमआईसी की बैठक में भी इस पर चर्चा नहीं हो सकी। झील संरक्षण योजना की फाइल वापस योजना शाखा को भेज दी गई। सूत्रों से जानकारी मिलने पर जब इस पत्र के संबंध मेंं अफसरों से बात की तो वे जानकारी देने से बचते रहे। आखिर वह पत्र सामने आया, जिसमें स्पष्ट तौर पर झील संरक्षण योजना की राशि को ब्याज सहित लौटाने का उल्लेख है।
इस संबंध में अभी तक तो नगर निगम आयुक्त रणवीर सिंह को कोई जानकारी है, ही महापौर श्रीमती पुष्पा शिल्पी को कुछ पता है। योजना शाखा के अधिकारियों को उम्मीद है कि केंद्र में भाजपा की सरकार है, राशि निगम से छिनेगी नहीं।
लेटलतीफी की वजह से दो साल पहले छिनी थी सीवरेज योजना
जानकारीके अनुसार 76 करोड़ की यूआईडीएसएसएमटी योजना 2006 में मंजूर हुई थी। करीब 17 करोड़ की राशि निगम को मिल चुकी है। इस योजना को लेकर भी निगम का रवैया गैर जिम्मेदाराना रहा। एसटीपी के लिए जमीन ढूंढ़ने में ही 3 साल लग गए। जिससे योजना पर काम शुरू नहीं हो सका।
दो साल पहले केंद्र सरकार ने सीवरेज योजना को भी सागर से वापस लेने का पत्र जारी कर दिया था। बाद में शहर के जनप्रतिनिधि पूर्व केंद्रीय मंत्री कमलनाथ से मिले और योजना को हाथ से जाने से बचाया। ताजा हालात यह हैं कि निगम एसटीपी के लिए तीन से चार बार टैंडर बुला चुका है, लेकिन सफलता नहीं मिली। अधिकारी इसकी वजह प्रोजेक्ट की लागत बढ़ना बता रहे हैं। इस बार इस पूरे प्रोजेक्ट का टैंडर निकाला है।
डॉ.हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय के बाद लाखा बंजारा झील से ही सागर दूर-दूर तक पहचाना जाना जाता है। झील से लोगों का आत्मिक जुड़ाव भी है। यहां के जनप्रतिनिधि और अफसरों की झील को संवारने में कम ही रुचि रही। अब तक झील के जीर्णोद्धार के नाम पर इसमें कागजी नाव ही चलाते रहे हैं।

नगर निगम | झील संरक्षण योजना की राशि लौटाने के संबंध में तो निगमायुक्त को खबर महापौर को है कुछ पता ।