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समिति अध्यक्ष सहित 5 पर एफआईआर

7 वर्ष पहले
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सागर। सिरोंजा स्थित आजाद नगर पुलिस गृह निर्माण सहकारी समिति के अध्यक्ष, पूर्व अध्यक्ष एवं सहकारी विभाग के तीन अन्य कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। एडिशनल एसपी डीआर तेनीवार की जांच के बाद यह कार्रवाई की गई है।
सिविल लाइंस थाना प्रभारी एमए सैय्यद के मुताबिक समिति अध्यक्ष लाल सिंह यादव, पूर्व अध्यक्ष मदन गोपाल मालवीय, सहकारिता विभाग के उप पंजीयक एके मिश्रा, बाबू डीआर कुम्हार, गोविंद मिश्रा की मिलीभगत से समिति का मूल बायलाॅज बदल दिया और फर्जी तरीके से चुनाव कराए लिए।
इसके बाद 22 प्लाॅट ऊंचे दामों पर उन लोगों को बेच दिए, जिनका पुलिस से वास्ता ही नहीं है और ही उनके परिवार का कोई सदस्य समिति का सदस्य रहा।

फर्जी ढंग से लालसिंह अध्यक्ष बना : जांच में पाया गया कि कोषाध्यक्ष लालसिंह यादव ने कुछ सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों अन्य लोगों के साथ मिलकर फर्जीवाड़े की शुरुआत की। सहकारिता विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर सबसे पहले मूल बायलाॅज गायब करा दिया, जिसमें प्रमुख शर्त यह थी कि समिति के सदस्य केवल पुलिसकर्मी रहेंगे और उन्हें ही प्लॉट का आवंटन किया जाएगा। मूल बायलाॅज में संशोधन के नाम पर उसे गायब करा दिया। मई 2011 में आदर्श बायलाॅज के नाम से अन्य नियम शामिल करा लिए। इसके तहत किसी भी व्यक्ति को इस संस्था के सदस्य होने के लिए पुलिसकर्मी होना जरूरी नहीं माना गया। बाद में लालसिंह ने फर्जी सदस्य बनाकर चुनाव कराया और खुद ही अध्यक्ष बन बैठा।

मनमर्जीसे अपात्रों को प्लॉट बेच दिए : सिविल लाइंस पुलिस के मुताबिक लालसिंह ने मनमर्जी से 22 प्लॉट ऐसे लोगों को ऊंचे दामों पर बेच दिए, जिनका पुलिस से कोई संबंध ही नहीं है। लगभग 243 वास्तविक सदस्यों को प्लॉट से वंचित कर दिया और उनकी सदस्यता अवैध ढंग से समाप्त कर दी गई। शिकायतकर्ता महादेव मिश्रा का कहना है कि लालसिंह यादव ने 22 प्लॉट के अलावा अन्य जो सदस्यों को पुलिसकर्मी होने के कारण प्लॉट आवंटित किए गए हैं, उनमें से भी अधिकांश व्यक्ति इस संस्था के वास्तविक सदस्य नहीं हंै। इसलिए वह भी अपात्र हैं।

2005में हुई थी शिकायत : समिति में फर्जीवाड़े की लिखित शिकायत वर्ष 2005 में आरक्षक महेश तिवारी एवं अन्य 5 लोगों ने डिप्टी रजिस्ट्रार सहकारी संस्थाएं में की थी। वरिष्ठ सहकारी निरीक्षक आरएस बादल ने शिकायत की जांच की। जांच में लालसिंह यादव के विरुद्ध की गई पूरी शिकायत सही पाई गई। जांच प्रतिवेदन डिप्टी रजिस्ट्रार को सौंप दिया गया, लेकिन उन्होंने कोई ध्यान नहीं दिया।

हाईकोर्ट के निर्देश बेअसर : शिकायतकर्ता महादेव मिश्रा एवं दस अन्य सदस्यों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने सहकारिता विभाग को आदेश जारी किया कि इस प्रकरण में ठोस कार्रवाई की जाए। सुरखी विधायक गोविंद सिंह राजपूत ने दो बार विधानसभा में यह मामला उठाया, यहां भी उन्हें गलत जानकारी दी गई। दो माह पहले देवरी विधायक हर्ष यादव ने भी विधानसभा में इस मामले का प्रश्न लगाया है।

2012 में रजिस्ट्री पर रोक : शिकायतकर्ताओं ने वर्ष 2011 में कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी सागर के न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया था। न्यायालय ने 3 अप्रैल 2012 को रजिस्ट्रियों पर रोक लगा दी, जो अभी भी जारी है। इस आदेश में अध्यक्ष लालसिंह यादव की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए गए। लेकिन लंबे समय तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई। बाद में सहकारिता आयुक्त ने जांच पुलिस को सौंपी।

243 सदस्य थे : समिति में कुल सदस्य संख्या 243 थी। इनमें से अधिकांश सदस्यों ने समिति द्वारा निर्धारित प्लॉट की कीमत एवं विकास शुल्क जमा करा दिया था। उस समय 1500 वर्गफुट प्लॉट की कीमत विकास शुल्क सहित 12 हजार 500 रुपए निर्धारित की गई थी। बाद में समिति के अध्यक्ष पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त हो गए और उनकी मृत्यु हो गई। इनके बाद प्रधान आरक्षक मदनगोपाल उपाध्याय अध्यक्ष बनाए गए। खास बात यह रही कि दोनों अध्यक्षों के कार्यकाल में कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी आरक्षक लालसिंह यादव संभालता रहा।

वर्ष 1981 में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अयोध्यानाथ पाठक ने समिति का सहकारिता विभाग में पंजीयन कराया था। समिति का मकसद पुलिस परिवारों को सस्ती दर पर प्लॉट मुहैया कराना था। समिति के लिए शासन ने ग्राम सिरोंजा में केवल भू-भाटक पर 15 एकड़ जमीन का अलॉटमेंट किया था। प्रधान आरक्षक शिवकुमार पाठक को समिति का अध्यक्ष बनाया गया था।
1981 में बनी थी समिति
बायलॉज बदलकर फर्जी चुनाव कराए, अपात्रों को महंगे दामों पर बेचे प्लाॅट, उप-पंजीयक सहकारिता विभाग के दो कर्मचारियों पर केस ।