सागर। राज्य एफएसएल की डीएनए लैब इस समय संकट से गुजर रही है। डीएन जांच किट खत्म होने के कारण बीते तीन महीने से लैब में बायोलॉजिकल जांचें बंद हैं। इसका सीधा प्रभाव पुलिस न्याय व्यवस्था पर पड़ रहा है। लैब में प्रकरणों की पेंडेंसी बढ़ रही है सो अलग। किट खत्म होने का कारण विदेशी सप्लायर कंपनी से ऑर्डर नहीं आना बताया जा रहा है। लैब के वैज्ञानिक अधिकारियों के अनुसार देश में डीएनए जांच किट तैयार नहीं होती। जरूरत पड़ने पर इन्हें हमेशा अमेरिका, जर्मनी जैसे पश्चिमी देशों से मंगाना पड़ता है।
पुलिस की जांच अटकी : लैब का काम बंद होने से सबसे ज्यादा फर्क लैंगिक अपराधों की पुलिस जांच पर पड़ रहा है। पुलिस अफसरों के अनुसार इससे सामूहिक दुष्कृत्य के मामले में ज्यादा परेशानी सकती है। संबंधित प्रकरण के आरोपी डीएनए जांच रिपोर्ट नहीं आने के कारण पुलिस पर न्यायालय के जरिए दबाव बनाने की कोशिश कर सकते हैं। यही स्थिति नाबालिगों के साथ होने वाले लैंगिक शोषण पर लागू होती है। ऐसे मामलों में कोर्ट ने सीमित समय में जांच पूर्ण कर चालान पेश करने के लिए कहा है।
तो पेंडेंसी कंट्रोल करना होगा मुश्किल : एक ओर डीएनए लैब में कामकाज बंद है। वहीं दूसरी ओर यहां राज्य भर से डीएनए सैंपल्स का आना जारी है। जुलाई 2014 में जहां पेंडिंग सैंपल्स की संख्या 500 के आसपास थी। वह अब 600 के पार हो गई है। जानकारों के अनुसार अगर और कुछ समय तक जांच किट नहीं आती है तो लैब को पेंडेंसी की समस्या से उबारना मुश्किल हो जाएगा। लैब में पहले से ही स्टाफ की संख्या घटते-घटते तीन वैज्ञानिकों पर गई है। इनमें से भी एक वैज्ञानिक जल्द रिटायर्ड होने वाले हैं। नया स्टाफ नहीं मिला तो यह पेंडेंसी बढ़ती ही जाएगी।
ऑर्डर हो गया है , जल्द आएंगी किट्स
''लैबकी किट खत्म होने के पीछे कुछ तकनीकी व्यवहारिक समस्याएं रहीं, लेकिन अब राज्य सरकार ने एक कंपनी को करीब 8 लाख रुपए की किट सप्लाई करने का ऑर्डर दे दिया है। इधर हमारे वैज्ञानिक लैब में आने वाले प्रत्येक सैंपल से डीएनए को अलग करते जा रहे हैं, किट आने के बाद उनका मिलान कर लिया जाएगा। जांच प्रकरणों की पेंडेंसी बढ़ रही है, जिससे निपटने के लिए सीडीएफडी
हैदराबाद से दोबारा अनुबंध किया जाएगा।''
-एसके तिवारी, निदेशक,राज्य एफएसएल मप्र, सागर
फाइल गुमने से अटकी खरीदी: करीब चार साल बाद ऐसा मौका आया है, जब डीएनए लैब में काम पूरी तरह से बंद हुआ है। इससे पहले केवल लैब के शुरुआती तीन साल में यह नौबत आई थी। 2010 के बाद एक बार भी सामग्री कम नहीं पड़ी। इधर लैब में किट समय पर नहीं आने के पीछे एक ही कारण बताया जा रहा है कि वित्त वर्ष 2013-14 में मांगे गए बजट की एक फाइल पुलिस मुख्यालय से गायब हो गई। एफएसएल की यह महत्वपूर्ण फाइल वित्त वर्ष समाप्त होने के बाद मिली। तब तक राशि लैप्स हो चुकी थी। इसके चलते किट खरीदने की प्रकिया दोबारा शुरू की गई। इस बीच लैब का काम ठप पड़ गया।
(प्रतीकात्मक तस्वीर)