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- सवा घंटे तक जिला अस्पताल में किसी को पता ही नहीं था कि शिशु चोरी हो गया
सवा घंटे तक जिला अस्पताल में किसी को पता ही नहीं था कि शिशु चोरी हो गया
दिनभरपरेशान होने के बाद पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंची। सीएसपी गौतम सोलंकी ने चौकी पहुंचकर महिला को फटकार लगाई, लेकिन वह सुनती रही। उससे उसके पति से कहा कि अभी वक्त है बता दो। इसके बाद भी वह अस्पताल प्रबंधन को दोषी ठहराती रही। सीएसपी ने महिला से सख्ती बरतनी शुरू की तो वह टूट गई और कहा कि साहब बच्चा मैंने ही चुराया है। वह घर पर है। पुलिस ने उसके घर पहुंचकर बच्चा बरामद किया। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।
सीसीटीवी कैमरे बंद पड़े हैं : पुलिसको बच्चे की जानकारी जुटाने में काफी मशक्कत करना पड़ी। अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरे बंद पड़े हैं। केवल यहां स्थित पुलिस चौकी का सीसीटीवी कैमरा चालू है। अस्पताल के कैमरे चालू होते तो बच्चे का जल्द पता लग जाता।
औरनर्स घबरा गई : महिलासे पुलिस ने कहा उस नर्स को पहचानों, जिसने बच्चा लिया है। महिला पुलिस को वार्ड-वार्ड घुमाती रही। वार्ड नंबर 5 में महिला ने नर्स मोहिश्वरी बम्बोरे की तरफ इशारा कर कहा कि साहब यही है वो नर्स। नर्स घबरा कर बोली यह झूठ बोल रही है। देखते-देखते ही कई नर्स पहुंची।
ऐसेआई महिला शक के दायरे में : पुलिसको महिला पर उस समय शक हुआ जब वह वार्ड नंबर 5 में पहुंची। बच्चे को किसी भी सूरत में इस वार्ड में नहीं ले जाया जाता है। इसके बाद पुलिस ने महिला और उसके पति पर दबाव बनाना शुरू किया। पुलिस चौकी ले जाकर घंटों तक दोनों को समझाइश दी। थाना प्रभारी ने कहा कि सच बता दो नहीं तो ठीक नहीं होगा। बच्चे का मामला है। महिला लगातार झूठ बोलती रही। आखिरकार शाम को पुलिस ने महिला से सच उगलवा लिया।
नर्सऔर सब इंस्पेक्टर की नोकझोंक : वार्डनंबर 5 में उस समय बहेरिया के सब इंस्पेक्टर रवि भूषण पाठक और नर्स के बीच नोकझोंक हो गई, जब वह नर्स से पूछताछ कर रहे थे। नर्स अपना नाम नहीं बता रही थी। सब इंस्पेक्टर ने कहा कि जानकारी देने में क्या हर्ज है। दूसरी नर्सों की समझाइश के बाद मामला शांत हुआ।
इस मामले में अस्पताल प्रबंधन कम जिम्मेदार नहीं है। सीएसपी गौतम सोलंकी का कहना है कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि बच्चा अस्पताल के सुपुर्द होने के बाद उसकी जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं। यह गंभीर मामला है। सिविल सर्जन ने मामले की गंभीरता ही नहीं समझी। गनीमत है कि बच्चा मिल गया। प्रबंधन को अपनी कार्यशैली में बदलाव लाना होगा, कर्तव्य और जिम्मेदारी का अहसास होना चाहिए।
सागर. अस्पतालसे बच्चा ले जाने की आरोपी महिला और उसके पति से पूछताछ करती पुलिस।
8.50 बजेसुबह बच्चा मिला।
9.55बजेबच्चा अस्पताल लाए।
10.30बजेबच्चा गायब हुआ।
11बजेपुलिस को सूचना मिली।
11.30बजेपूछताछ शुरू हुई।
11.45बजेप्रबंधन को पता चला।
12.50बजेबहेरिया पुलिस महिला को लेकर आई।
2.30बजेतक महिला पुलिस के साथ बच्चा ढूंढती रही।
2.35बजेसीएसपी गौतम सोलंकी अस्पताल पहुंचे।
3.40बजेमहिला उसके पति से पूछताछ की।
3.50बजेसिविल सर्जन से फोन पर बात की।
5.45बजेमहिला ने सच उगला दिया।
क्राइम रिपोर्टर | सागर
जिसदंपती ने लावारिस हाल में सड़क पर पड़े बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराया। उसे ही वहां से चोरी कर ले गए। अस्पताल प्रबंधन को इसकी भनक काफी देर बाद लगी। मामला पुलिस तक पहुंचा। पुलिस ने महिला के घर दबिश दी। दिनभर वह पुलिस को गुमराह करती रही। शाम को जब पुलिस ने महिला से सख्ती से पूछताछ की तो उसने पूरी कहानी उगल दी।
पुलिसने दिखाई मुश्तैदी : बच्चागायब होने का सबसे पहले मैसेज पुलिस कंट्रोल रूम पहुंचा। सभी थानों को सूचना भेजी गई। पुलिस अस्पताल पहुंची। प्रबंधन से पूछताछ की तो बताया कि बच्चे को एमएलसी कराने भेजा था, लेकिन वापस नहीं आया। महिला की तलाश की गई तो पता चला कि वह घर चली गई। तत्काल बहेरिया थाना प्रभारी लक्ष्मण सिंह अनुरागी को सूचना दी। वे महिला के घर पहुंचे और उसे उसके पति को अस्पताल लेकर आए।
दिनभर पुलिस को महिला गुमराह करती रही : पुलिसने महिला से कहा कि बच्चा कहां गया तो उसने कहा कि नर्स ने कागज बच्चा अपने पास रख लिया। पुलिस ने पूछा तो वह नर्स कहां है। महिला पुलिस को घुमाती रही। पुलिस महिला को शिशु रोग वार्ड ले गई। वहां एक नर्स से पूछताछ की। नर्स ने कहा कि बच्चा यहां आया ही नहीं है। महिला पुलिस को 5 नंबर वार्ड ले गई।
महिला से बरामद नवजात को लिए पुलिसकर्मी।