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आमदनी कम, खर्चा ज्यादा लक्षण हैं मिट जाने के : मुनिश्री

7 वर्ष पहले
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रहली|मोहली में विराजमान पूर्णसागर महाराज ने प्रवचन दिए। सोमवार को उन्होंने एक प्रसंग के माध्यम से धर्म की बातें बताईं। उन्होंने सुनाया कि एक सज्जन पुरुष जंगल गुजरते समय देखते हैं कि सारे जानवर और पक्षी भाग रहे हैं। उस व्यक्ति ने बंदर को रोककर पूछा जंगल का साम्राज्य कहा भागा जा रहा है। बंदर ने जवाब दिया, रोको मत प्रलय होने वाला है। उस व्यक्ति ने पुन: पूछा आखिर कहां, कैसा प्रलय रहा है? बंदर का जवाब था आगे वालों से पूछो। वह व्यक्ति भागता हुआ खरगोश के पास पहुंचा और वही प्रश्न दुहराया। खरगोश बोला महाप्रलय रहा है, तुम भी जल्दी भागो। कहने का मतलब उन्हीं जानवरों की तरह आज का इंसान भी भागा जा रहा है।

आज के आदमी को जरूरत भले ही हो मोबाइल, टीवी, बाइक आदि कि चाह में वह जरूर भटक रहा है। वह तो सिर्फ एक दूसरे को देखकर भाग रहा है। नीतिकार कहते हैं - कूबत कम, गुस्सा ज्यादा लक्षण है पिट जाने के, आमदनी कम, खर्चा ज्यादा लक्षण हैं मिट जाने के.।