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वात्सल्य तो वह भाव है जो परमात्मा से मिला देता है : आचार्यश्री
सम्यकदर्शनप्रकट होने की क्या पहचान है। इसके लिए यह जानना जरूरी है कि सम्यकदर्शन तत्वों के यथार्थ श्रद्धान का नाम है और वह श्रद्धान जीव के लिए होता है, वही उसका अधिकारी है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने आप को सम्यकदृष्टि माने सो ऐसा हो नहीं सकता क्योंकि वस्तु तत्व का निर्णय करने की सभी में क्षमता नहीं है अत: क्षमतावान ही सम्यकदर्शन को प्राप्त कर सकता है। यह बात वर्णी भवन मोराजी में विराजमान आचार्य श्री विभव सागर महाराज ने कही। उन्होंने कहा कि जब आत्म-साधना का रस आता है तो स्वरूप बदल जाता है। इसकी पहली विशेषता है धर्मात्मा की प्रीति, जब र|त्रय के प्रति प्रीति उत्पन्न होती है तो वह धर्मानुराग कहलाता है। वात्सल्य तो वह भाव है जो परमात्मा से मिला देता है। वात्सल्य धर्मात्मा को धर्मात्मा के प्रति आकांक्षा को सिखाता है। सम्यकदृष्टि को देखकर वात्सल्य-भाव प्रकट हो जाता है। परिस्थिति में सम्यकदर्शन की पहचान होती है। दूसरा गुण विनय है जिसे अंतरंग तप कहा है। तीसरा गुण है अनुकंपा समस्त जीवों के प्रति दया का भाव रखना। दान देना अपने तथा पर के उपकार के लिए जो द्रव्य दिया जाता है। वह दान है। दान देने से अपना ममत्व-भाव कम होता है और दान लेने वाले की इच्छा पूर्ण होती है इस प्रकार दान क्रमश: ज्ञानदान, आहारदान, औषधि-दान और अभयदान है। साधु निरंतर ज्ञानदान देते रहते है। प्रशंसा आत्मा के गुणों की प्रशंसा मोक्ष का कारण है। यद्यपि मिथ्यात्व के उदय में धर्म का उपदेश कड़वा लगता है। मिथ्यात्व धर्म की भावना से दूर कर देता है। हम मोक्षमार्ग पर चले। संपूर्ण व्यक्ति मोक्षमार्ग पर चलें ऐसी भावना प्रत्येक व्यक्ति को निरंतर भावी चाहिए। दीक्षा ग्रहण कर व्रतों को अंगीकार करो। दूसरों के दोषों को प्रकाशित मत करों। धर्म से विचलित हो रहे समस्त भव्यजीवो को धर्ममार्ग में लगाओ यह सब क्रियाएं सम्यकत्व प्राप्ति के लिये अति आवश्यक है। आचार्यश्री विभवसागर महाराज ससंघ के सानिध्य में प्रवचन सभा हुई। संचालन श्री अशर्फीलाल ने किया। मंगलाचरण के बाद मुनिश्री आचरण सागर महाराज ने कहा कि भवसागर पार करने के लिए र|त्रयधारी निग्रंथ मुनि पद धारण करना आवश्यक है।
श्रीमद् भागवत कथा : तिरुपतिपुरम कॉलोनी
सागर . शहर के भगतसिंह वार्ड में श्रीमद भागवत कथा चल रही है। कथा में शहर सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों से श्रद्धालु उमड़ रहे है