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युवा उद्यमियों के लोन प्रकरण मंजूर कराओ, तब मिलेगा वेतन
संभागमें पदस्थ जिला उद्योग एवं व्यापार केंद्र के महाप्रबंधकों इस महीने वेतन नहीं मिलेगा। यह आदेश विभाग के प्रमुख सचिव सुलेमान खान ने दिया है। अफसरों का वेतन टांगने की यह नौबत इसलिए आई है क्योंकि संभाग में मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना की स्थिति बहुत खराब है। संभागीय मुख्यालय पर ही 30 प्रकरण के लक्ष्य के विरुद्ध एक भी युवा को लोन नहीं मिला है। यही स्थिति संभाग के बाकी चार जिले दमोह, टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना की भी है। अफसरों के वेतन पर रोक लगाने का यह निर्णय दो दिन पहले हुई योजना की समीक्षा के बाद लिया गया है।
टीकमगढ़और दमोह में दो अंकों में भी नहीं बने प्रकरण : योजनाकी दुर्दशा का अंदाजा इस स्थिति से भी लगाया जा सकता है कि संभाग के दमोह और टीकमगढ जिले में 10 से भी कम प्रकरण बने हैं। और इनमें से एक भी बैंक तक नहीं पहुंच पाया है। इससे थोड़ी ठीक स्थिति छतरपुर और पन्ना जिले की है। जहां प्रकरण बैंक तक पहुंचे लेकिन यहां भी लोन एक भी व्यक्ति को नहीं मिला। सागर इस मामले में थोड़ा बेहतर स्थिति में है। कुल जमा 30 के लक्ष्य के विरुद्ध करीब 45 प्रकरण तैयार कर 28 को बैंक मंजूरी के लिए भेज दिया गया। हालांकि बाकी चार जिलों की तरह यहां भी एक भी हितग्राही को लोन नहीं मिला।
31दिसंबर तक करना है लक्ष्य पूरा : इधरयुवा उद्यमी योजना के मामले में सुस्ती बरतने पर प्रमुख सचिव खान ने वीडिया कॉन्फ्रेन्सिग पर सभी महाप्रबंधकों काे कड़ी फटकार लगाई है। उनका कहना था कि आप लोगों को योजना के लांच होने के बाद ही बता दिया गया था कि 31 दिसंबर तक प्रत्येक जिला अपने-अपने लक्ष्य के अनुसार लोन वितरण कराए। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस सब के लिए आप लोगों द्वारा अधीनस्थ स्टाफ की मॉनीटरिंग नहीं करना मुख्य कारण है। खान ने कहा कि आप लोगों को मालूम होना चाहिए कि युवा उद्यम योजना, मुख्यमंत्री के प्राथमिकता वाले कार्यक्रम में शामिल है। इसके बावजूद इतनी लापरवाही की गई।
लक्ष्यकी पूर्ति में इसलिए पिछड़ गए : युवाउद्यम योजना में पिछड़ने के पीछे विभाग के अफसरों के अपने ही तर्क हैं। जिले में पदस्थ एक अफसर का कहना है कि इस योजना के तहत हमें कम से कम 10 लाख और अधिकतम 1 करोड़ रुपए का लोन देना होता है। समस्या यह है कि पहले तो हमें 10 लाख या उससे अधिक की राशि के प्रकरण बनवाने होते हैं। इसके बाद जब हम उसे बैंक की मंजूरी के लिए