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अब थानों में मिलेगा हर व्यक्ति का लेखा-जोखा

6 वर्ष पहले
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सागर। अगर आपके घर पुलिस का जवान घर-परिवार से जुड़ी जानकारी मांगने आए तो घबराने की जरूरत नहीं है। उसे बेहिचक जानकारी दीजिएगा। दरअसल पुलिस विभाग ने बीट प्रभारियों काे 60 बिंदुओं पर जानकारी एकत्र करने के लिए प्रो-फाॅर्मा दिया है। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि हर हाल में जानकारी जुटाई जाए। चूंकि इतनी ज्यादा जानकारी एक दिन में जुटाना संभव नहीं है। लिहाजा उन्हें एक दिन में न्यूनतम पांच बिंदुओं पर जानकारी जुटाना ही है।
प्रो-फाॅर्मा में कई कॉलम दिए गए हैं। इनमें बीट प्रभारी को अपने इलाके से जुड़ी हर जानकारी देना होगी। मसलन कितने लोग रहते हैं, उनका नाम, उम्र, व्यवसाय क्या है। अपराधी कितने हैं। वर्तमान में वे कहां और क्या कर रहे हैं। प्रत्येक व्यक्ति का मोबाइल नंबर दर्ज करना। महिलाओं की संख्या कितनी है। व्यापारी, छात्र, मजदूर, उद्योग धंधे, होटल, रेस्टोरेंट, शराब दुकान, सैलून दुकान, कोचिंग सेंटर, स्कूल, कॉलेजों की संख्या कितनी है। यहां तक हर व्यक्ति की संपत्ति का विवरण भी प्रो-फाॅर्मा में भरना होगा।

ये देनी है जानकारी : व्यवसाय,अपराधी, संपत्ति, स्कूल, कॉलेज, घर, हाेटल, रेस्टोरेन्ट, लॉज, टॉकीज, साइबर कैफे, दुकानें, मोबाइल नंबर, कोचिंग सेंटर, महिलाओं की संख्या, पार्क आदि का विवरण प्रो-फाॅर्मा में भरना होगा।

पद्माकर थाना प्रभारी ने जानकारी जुटाने के टिप्स बताए : पद्माकरथाना प्रभारी आलोक सिंह परिहार ने तो अपने क्षेत्र के बीट प्रभारियों को बाकायदा प्रशिक्षण दिया है। इसमें उन्होंने जानकारी जुटाने के दौरान आने वाली व्यवहारिक दिक्कतों से निपटने के टिप्स भी दिए हैं। उनका कहना है कि यह स्वाभाविक बात है कि इतनी अधिक जानकारी हासिल करने में बीट प्रभारियों को दिक्कतों से भी जूझना पड़ेगा।

ये होंगे फायदें : सीएसपी गौतम सोलंकी का कहना है कि इसका पहला फायदा यह होगा कि निकट भविष्य में पुलिस के पास हर आदमी की कुंडली उपलब्ध रहेगी। किसी भी व्यक्ति की जानकारी मिनटों में मिल सकेगी।
दूसरा फायदा यह होगा कि जानकारी देने के बाद हर व्यक्ति में एक तरह का भय बना रहेगा। इससे अपराधों में भी कमी आएगी। अगले एक दो साल में यह जानकारी कंप्यूटर पर लोड कर दी जाएगी। इसके अलावा एफआईआर भी ऑनलाइन किए जाने की तैयारी है। सागर जिले में लगभग 26 और शहर में 8 थाने हैं। हर थाने में दो-दो बीट हैं।