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स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मथुराप्रसाद दुबे को गार्ड ऑफ ऑनर देकर दी अंतिम विदाई
स्वतंत्रतासंग्राम सेनानी मथुराप्रसाद दुबे की पार्थिव देह रविवार को पंचतत्व में विलीन हो गई। वह 95 वर्ष के थे। अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ नरयावली नाका मुक्तिधाम में हुआ। जिला प्रशासन की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर देकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी को अंतिम विदाई दी गई। कांग्रेस सेवादल द्वारा भी उन्हें ऑनर दिया गया। अंतिम यात्रा परकोटा से निकली। गेंडाजी धर्मशाला जहां स्वर्गीय दुबे रहा करते थे वहां पर आसपास के दुकानदारों एवं एकता समिति द्वारा पुष्पांजलि अर्पित की गई। मथुराप्रसाद दुबे की मुंहबोली बहन सिस्टर फ्लिप्पा ने भी पहुंचकर श्रद्धासुमन अर्पित किए। महापौर अभय दरे, डॉ. अनिल त्रिपाठी दमोह, वीरेंद्र गौर, माधव कटारे, आशीष गुप्ता सहित बड़ी संख्या में लोगों ने शामिल होकर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
गांधीजीसे मिले, कई लड़ाइयां लड़ीं: आजादीकी लड़ाई के लिए प्रति व्यक्ति जागरूक करने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी सागर आए थे तो मथुराप्रसाद दुबे ने भी उनसे मुलाकात की थी। इसके अलावा आजादी के लिए कई लड़ाइयां भी उन्होंने लड़ीं। लंबे समय तक जेल भी रहे। अविवाहित रहे। जो उनको पेंशन मिलती थी, उसको वह गरीब कन्याओं की पढ़ाई, शादी एवं अन्य जरूरतमंद लोगों को दे दिया करते थे।
शोकसभाआयोजित: एकतासमिति ने रविवार को आयोजित शोकसभा में स्वर्गीय मथुरा प्रसाद दुबे को श्रृद्धांजलि दी। सभा में चंपक भाई, सुधीर जैन, अशोक सुंदरानी, कुंजीलाल तिवारी, सतीष खत्री, बेनी साहू, अनवर खान, अजित जैन, सुभाष, विनीत जैन आदि मौजूद थे। जिला कांग्रेस सेवादल अध्यक्ष अतुल नेमा, राजाराम सरवैया, वीरेंद्र गौर ,सुरेंद्र सुहाने, मदन सोनी आदि ने भी श्रृद्धांजलि अर्पित की।
सागर. नरयावलीनाका शमशान घाट में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मथुरा प्रसाद दुबे के निधन पर गार्ड आॅफ आनर देते हुए।