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मेडिकल कॉलेज में दो डॉक्टरों के भरोसे शुरू की गई है प्रसूता इकाई

7 वर्ष पहले
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बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में लेबर रूम प्रारंभ तो कर दिया गया, लेकिन समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। फिलहाल केवल दो डॉक्टरों के भरोसे यह इकाई चालू की गई है। ट्रेंड स्टाफ की दरकार भी यहां बनी हुई है। बीएमसी प्रबंधन के अनुसार लेबर रूम में पिछले तीन दिन में चार प्रसव कराए गए हैं। पहला केस तो लेबर रूम तक भी नहीं पहुंच पाया था। यहां पर 24 घंटे की तीन शिफ्टों में केवल दो डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है। विभाग की दो अन्य डॉक्टर फिलहाल अवकाश पर हैं। जूनियर सीनियर रेसिडेंट डॉक्टरों की भी कमी बनी हुई है। कुल मिलाकर समस्याएं अभी भी जस की तस हैं। रात के समय इमरजेंसी में डॉक्टरों को घर से लाने के लिए कॉलेज में एंबुलेंस या कॉल ड्यूटी वाहन भी नहीं है।

कोसते-कोसतेचले गए लोग : प्रसवके लिए ग्रामीण क्षेत्रों से करीब दो दर्जन से अधिक प्रसूताओं को लेकर दर्जनों लोग पहले जिला महिला अस्पताल (डफरिन) पहुंचे। यहां से उन्हें मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया। यहां भी स्टाफ की कमी के चलते केवल 5 महिलाओं को ही भर्ती कर चार के प्रसव कराए गए थे। बाकी प्रसूताओं को वापस जिला महिला अस्पताल भेज दिया। महिला अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ ने यह कहकर फिर वापस कर दिया कि मेडिकल कॉलेज से कागज पर लिखवाकर लाओ। दोनों चिकित्सा संस्थानों में चक्कर लगाने के बाद परेशान लोग स्टाफ को खूब खरी-खोटी सुनाकर गए। दो दिन दर्जन भर लोगों से ड्यूटी पर तैनात लोगों की बहस हुई है।

हम व्यवस्थाएं बना रहे हैं

^लेबररूम शुरू कर प्रसूताओं को भर्ती किया जा रहा है। कुछ दिक्कतें तो रही हैं। हम व्यवस्थाएं कर रहे हैं। जिला अस्पताल से भी सहयोग ले रहे हैं। ओपीडी बंद होने के बाद कैजुअल्टी के माध्यम भर्ती कराया जाएगा। -डॉ. आरएस वर्मा, अधीक्षक,बीएमसी सागर