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हृदय परिवर्तन के लिए आते हैं मांगलिक कार्यक्रम : आचार्यश्री

7 वर्ष पहले
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वर्णीभवन मोराजी में वर्षाकालीन चातुर्मास के सानंद समापन पर आचार्य विभव सागर महाराज के ससंघ सानिध्य में रविवार को पिच्छिका परिवर्तन समारोह हुआ। समारोह के पूर्व रामपुरा से पिच्छिकाएं शोभायात्रा के रूप में आचार्यश्री के सानिध्य में ले जाई गईं। आचार्यश्री ने कहा कि अनादि से मैंने पंच परावर्तन किए। साथ ही द्रव्य एवं क्षेत्र एवं काल तथा भव परावर्तन किए। किंतु हृदय का परावर्तन नहीं किया। ये सब मांगलिक कार्यक्रम हृदय को परिवर्तित करने के लिए आते हैं। जिनसे ही संयम के भाव जन्म लेते हैं। सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चारित्र आत्मा में पैदा हो जाते हैं।

आचार्यश्री ने कहा कि सबसे पहले तो मिथ्यात्व का परिवर्तन कर दें। हृदय का मिथ्यात्व सम्यकत्व में परिवर्तित हो जाएगा। पुराने भाव बदलकर नए भाव आने चाहिए। पिच्छि संयम का उपकरण है। समारोह के पूर्व रामपुरा में नगर विधायक शैलेंद्र जैन ने आचार्यश्री का श्रीफल भेंट कर किया। वार्ड से आचार्यश्री के सानिध्य में पिच्छिकाएं गाजे-बाजे के साथ शोभायात्रा के रूप में ले जाईं गई। शोभायात्रा में बलराम घोषी, किरण मिश्रा, संतोष पटना, ज्ञानचंद पिड़रूआ, महेंद्र बलेह, अशोक पिड़रूआ, प्रो. केके सराफ, मुकेश जैन, श्रैणिक जैन, श्रीकांत जैन, देवेंद्र जैन, कैलाश जैन, जयकुमार जैन, जिनेश पेटी, शिथिंल पड़ेेले आदि मौजूद थे।

सागर . वर्णी भवन मोराजी जैन मंदिर में पिच्छिका परिवर्तन समारोह में विराजे मुनिश्री का प्रवचन सुनते श्रद्धालु।