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माखन चोरी के माध्यम से श्रीकृष्ण ने श्वेत क्रांति का उदघोष किया
कृष्णशब्द से कृ मछली पकड़ने वाले उस कांटे की तरह है जो एक बार मछली के मुंह में चुभा, कि मछली उस कांटे में फंस गई। उसी तरह कृ का झकार भक्तों के ह्दय में बस गया फिर नहीं निकलता है। यह बात खेल परिसर के बाजू वाले मैदान में चल रहे संगीतमय श्रीमद भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन की कथा में श्रीधाम वृन्दावन से पधारे भागवत मर्मज्ञ डॉ. श्याम सुंदर पाराशर शास्त्री ने कही। उन्होंने कहा कि माखन चोरी के माध्यम से श्रीकृष्ण ने श्वेत क्रांति का उदघोष किया। क्योंकि गायों के दूध पर सर्वप्रथम अधिकार बछड़ों का है। उसके बाद गायों की सेवा करने वाले ग्वालों का है। पर ग्वालों के माता पिता गायों का गोरस मथुरा में कंस के यहां बेच कर आते हैं। गोरस मथुरा जाने पाये इसलिए श्रीकृष्ण ने माखन चोरी करना प्रारंभ किया। डॉ. शास्त्री ने कहा भक्त परमात्मा को प्राप्त करने के लिए परिश्रम करे और परमात्मा की कृपा हो तब भगवान की समीपता का भक्त अनुभव कर सकता है। कन्हैया ने इंद्र के पूजन को बंद कराकर गिरिराज गोवर्धन की पूजा इसलिए शुरू कराई की हमारे देश भारत में चरित्रवान की पूजा होती है। मैं तो गोवर्धन को जाऊं, मेरे वीर नाए माने मेरो मनुआ, भजन सुन कर श्रोता झूम उठे नृत्य करने लगे। सभा का संचालन कर रहे आचार्य संतोष गौतम ने कहा भगवान का अवतार संसार के समस्त जीवों का उद्धार करने के लिए होता है। भगवान के चरित्र का श्रवण कर हम सभी उस परमात्मा के स्वरूप को प्राप्त कर सके।
सागर. रविवार को जोरदार सर्दी के बावजूद भागवत कथा सुनने बड़ी संख्या में महिलाएं अन्य श्रद्धालु पहंुचे।