पहली बार उतरी, मारा मैदान, जीता गोल्ड
{एक्सीलेंस गर्ल्सकॉलेज की दो छात्राओं ने राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में किया सागर का नाम रोशन
{जिला,संभागऔर राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भी रहीं अव्वल
सिटीरिपोर्टर | सागर
पक्केइरादे, लगन और ईमानदारी से मेहनत की जाए तो कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। इसका जीता जागता उदाहरण एक्सीलेंस गर्ल्स डिग्री कॉलेज की बीकॉम की छात्रा रागिनी सिंह और शिवानी यादव हैं। इन्होंने नवंबर 2014 में इंदौर में हुई राज्य स्तरीय कुश्ती प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल हासिल किए हैं। रागिनी शुरू से जूडो तो शिवानी कबड्डी की खिलाड़ी थीं। दोनों के लिए कुश्ती नया खेल था। कॉलेज से जब दोनों का नाम कुश्ती के लिए तय किया गया। तब उन्होंने नहीं सोचा था कि वे इस खेल में कुछ खास कर पाएंगी। ईमानदारी से की गई मेहनत रंग लाती है। लाई भी। दोनों छात्राओं ने केवल जिला, संभाग बल्कि राज्य स्तर पर भी बेहतरीन खेल का प्रदर्शन कर गोल्ड मेडल जीता। इस सफलता का श्रेय दोनों खिलाड़ियों ने अपनी स्पोर्टस ऑफिसर मोनिका हार्डिकर, ट्रेनर मनीष यादव और शिवानी राठौर को दिया है।
नहीं सोचा था राज्य में सोना जीत लेंगे
राज्यस्तरीय कुश्ती प्रतियोगिता में गोल्ड जीतने वाली एक्सीलेंस गर्ल्स कॉलेज की बीकॉम की छात्रा रागिनी सिंह का कहना है कि कुश्ती की तैयारी करते वक्त नहीं सोचा था कि वे इतना बढ़ा मुकाम हासिल कर लेंगी। हालांकि पहले से जूडो का खिलाड़ी होने के कारण उन्हें कुश्ती के दांव-पेंच सीखने में ज्यादा दिक्कत नहीं हुई। सिर्फ 15 से 20 दिन की ट्रेनिंग और रोजाना दो घंटे अतिरिक्त अभ्यास ने उन्हें माइनस 73 वेट कैटेगरी में जिला, संभाग और राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक दिला दिया। अब शिवानी का अंतर विश्वविद्यालयीन प्रतियोगिता में गोल्ड जीतने का सपना है। इसके लिए वे अभी से तैयारी में जुट गई हैं।
जैसे-जैसेजीतते गए, कॉन्फिडेंस बढ़ता गया
शिवानीयादव ने बताया कि मुझे शुरूआत से ही खेलों में रुचि है, लेकिन यह खेल मेरे लिए एकदम नया था। नियम, दांव पेंच कुछ भी मालूम नहीं थे। प्रतियोगिताएं शुरू होने से पहले तैयारी के लिए हमारे पास वक्त भी काफी कम था। इससे पहले कॉलेज से किसी टीम ने भी कुश्ती में हिस्सा नहीं लिया था, जिससे हमें सपाेर्ट मिल सके। मैं शुरूआत से ही कबड्डी की खिलाड़ी रही हूं। इसलिए मुझे कुश्ती के दांव-पेंच सीखने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई। प्रेक्टिस में हम लोग काफी अच्छा खेल रहे थे। इससे आत्मविश्वास बढ़ता गया। फिर जैसे-जैसे जिला और संभाग स्तर पर माइनस 63 वेट कैटेगरी में जीत मिली तो तय कर लिया था कि स्टेट लेवल पर भी सोना ही जीतेंगे। शिवानी ने जिला स्तर पर जूडो में भी गोल्ड मेडल जीता है।
नहीं सोचा था राज्य में सोना जीत लेंगे
राज्यस्तरीय कुश्ती प्रतियोगिता में गोल्ड जीतने वाली एक्सीलेंस गर्ल्स कॉलेज की बीकॉम की छात्रा रागिनी सिंह का कहना है कि कुश्ती की तैयारी करते वक्त नहीं सोचा था कि वे इतना बढ़ा मुकाम हासिल कर लेंगी। हालांकि पहले से जूडो का खिलाड़ी होने के कारण उन्हें कुश्ती के दांव-पेंच सीखने में ज्यादा दिक्कत नहीं हुई। सिर्फ 15 से 20 दिन की ट्रेनिंग और रोजाना दो घंटे अतिरिक्त अभ्यास ने उन्हें माइनस 73 वेट कैटेगरी में जिला, संभाग और राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक दिला दिया। अब शिवानी का अंतर विश्वविद्यालयीन प्रतियोगिता में गोल्ड जीतने का सपना है। इसके लिए वे अभी से तैयारी में जुट गई हैं।
जैसे-जैसेजीतते गए, कॉन्फिडेंस बढ़ता गया
शिवानीयादव ने बताया कि मुझे शुरूआत से ही खेलों में रुचि है, लेकिन यह खेल मेरे लिए एकदम नया था। नियम, दांव पेंच कुछ भी मालूम नहीं थे। प्रतियोगिताएं शुरू होने से पहले तैयारी के लिए हमारे पास वक्त भी काफी कम था। इससे पहले कॉलेज से किसी टीम ने भी कुश्ती में हिस्सा नहीं लिया था, जिससे हमें सपाेर्ट मिल सके। मैं शुरूआत से ही कबड्डी की खिलाड़ी रही हूं। इसलिए मुझे कुश्ती के दांव-पेंच सीखने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई। प्रेक्टिस में हम लोग काफी अच्छा खेल रहे थे। इससे आत्मविश्वास बढ़ता गया। फिर जैसे-जैसे जिला और संभाग स्तर पर माइनस 63 वेट कैटेगरी में जीत मिली तो तय कर लिया था कि स्टेट लेवल पर भी सोना ही जीतेंगे। शिवानी ने जिला स्तर पर जूडो में भी गोल्ड मेडल जीता है।
राज्य स्तरीय कुश्ती प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतने वाली सागर की खिलाड़ी शिवानी यादव (बाएं) और रागिनी सिंह