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छात्र अपने दस्तावेज खुद कर सकेंगे सत्यापित

7 वर्ष पहले
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राज्यशासन ने शैक्षणिक दस्तावेजों के सत्यापन के लिए नई व्यवस्था लागू कर दी है। इसके तहत आवेदक स्वयं अपने दस्तावेज सत्यापित कर सकेंगे। इस नई व्यवस्था के शुरू होने से आवेदकों को हलफनामा बनवाने के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। शासन का यह निर्देश सभी सरकारी विभागों के अलावा स्थानीय निकाय, स्वायत्तशासी संस्थाओं और शैक्षणिक संस्थाओं पर भी लागू होगा।

गलतजानकारी प्रमाणित की तो सजा भी होगी : शासनके आदेशानुसार कोई भी आवेदक स्वयं की अंकसूचियां, जन्म प्रमाण-पत्र, मूल निवासी एवं जाति प्रमाण-पत्र सहित अन्य दस्तावेज सत्यापित कर सकेगा। हालांकि एडमिशन, चयन, साक्षात्कार आदि के समय संबंधित विभाग इन दस्तावेजों का उनकी मूल प्रति से मिलान करेगा। इस दौरान दस्तावेजों में कूट-रचना या झूठी जानकारी पाई जाती है तो संबंधित आवेदक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

एकप्रमाणीकरण पर खर्च होते हैं 20 रुपए : स्वयंसत्यापन व्यवस्था के लागू होने से गरीब साधनहीन छात्र वर्ग को सबसे ज्यादा फायदा होगा। वर्तमान में उन्हें किसी भी प्रतियोगिता, परीक्षा, नौकरी आदि में आवेदन करने से पहले एक-एक दस्तावेज को नोटरी वकील से सत्यापित कराना पड़ता है। इसके लिए उन्हें औसतन 20 रुपए तक प्रति दस्तावेज खर्च करना पड़ते हैं। हालांकि यह काम उनके ही स्कूल-कॉलेज के राजपत्रित शिक्षक, सरकारी अस्पताल के डॉक्टर या जिला प्रशासन सहित अन्य विभागों में कार्यरत अधिकारी (राजपत्रित दर्जा प्राप्त) भी कर सकते हैं, लेकिन उनके द्वारा अक्सर इन कामों को फर्जीवाड़े में फंसने के डर से टाल दिया जाता है।