सागर। जिला अदालत का नजारा शनिवार को मेले की तरह रहा। न्याय की आस में आए पक्षकारों का सुबह से देर शाम तक यहां जमावड़ा बना रहा। हर तरफ भीड़ थी। जिज्ञासा थी कि मामले का क्या हुआ। मौका था नेशनल लोक अदालत का। इसमें किसी की जीत और किसी की हार हुई, बस राजीनामे से सुलह के रास्ते खुले और हो गया केस का निपटारा। कई खंडपीठों के माध्यम से मामले निपटा दिए गए। इस दौरान करीब 15 लाख प्रकरणों के निपटाने का दावा किया गया है।
ऐसे निपटे इतने मामले : लोकअदालत में आए ज्यादातर मामले नगर निगम के बकाया, दुर्घटना बीमा दावा, बिजली कंपनी के बकाया या चोरी प्रकरण, बैंक बकाया आदि थे। ऐसे मामलों में आपसी सहमति से तत्काल कुछ फाइन आदि लगाकर निपटा दिया गया। कुछ ऐसे मामलों का भी निराकरण हुआ, जिनका राजीनामा तो पहले हो चुका था, लेकिन इन मामलों को लोक अदालत के लिए पेंडिंग कर दिया गया था। वकीलों ने बताया कि लोक अदालत की तैयारी दो-तीन माह पहले से शुरू कर दी जाती है। ऐसा बहुत कम होता है कि पक्षकार अचानक लोक अदालत में पहुंचेगा और उसी दिन राजीनामा के आधार पर उसका मामला सुलझा लिया जाएगा।
अलग-अलग काउंटर बनाए गए थे : पक्षकारों को किसी तरह की परेशानी हो, इसके लिए विभागों ने अलग-अलग काउंटर बनाए थे। नगर निगम ने वार्ड वार काउंटर की व्यवस्था की थी। नगर निगम, बिजली कंपनी एवं बैंकों के काउंटर पर पक्षकारों की सर्वाधिक भीड़ रही। कलेक्टर अशोक कुमार सिंह ने 13 निशक्तजनों को नियुक्ति पत्र दिए। इंश्योरेंस कंपनी की ओर से महेंद्र को 5 लाख रुपए का बीमा चेक दिया गया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश से पारित आदेश के तहत पक्षकार भगवती बाई को भी बीमा राशि का चेक दिया गया। बीएसएनएल के 4 हजार प्रकरणों में खात्मा लगाया गया। साथ ही 4 लाख 27 हजार रुपए की वसूली की गई। बीमा क्लेम के करीब 430 मामले निपटे और 1 करोड़ से अधिक की राशि वसूल की गई।
ये रहे उपस्थित : शुभारंभअवसर पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एचपी सिंह, कमिश्नर आरके माथुर, कलेक्टर अशोक कुमार सिंह, आईजी पंकज श्रीवास्तव, डीआईजी आईपी कुलश्रेष्ठ, रजिस्ट्रार दीपक शर्मा, अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष लखनलाल राठौर आदि उपस्थित थे।
30कृत्रिम उपकरण बांटे : लोकअदालत में निशक्तजनों को करीब 30 कृत्रिम उपकरण बांटे गए। इनमें 4 व्हीलचेयर, 7 कृत्रिम पैर, 7 कृत्रिम हाथ, 10 कैलिपर्स, 2 वाॅकिंग छड़ी, 2 ब्लाइंड छड़ी और बैसाखी शामिल हैं। विशेष न्यायाधीश भारत भूषण श्रीवास्तव ने बताया कि उपकरण इंदौर से मंगाए गए थे। इस संबंध में जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कलेक्टर से चर्चा की थी। कैंट इलाके की तीन साल की बच्ची सरोज कन्नौजिया, पिपरिया के श्रेयांस नायक, गोपालगंज के जोगेश्वर लोधी, दयानंद वार्ड के इम्तियाज खान, बरौदा के उमेश मिश्रा, मंजला गांव के भागवत रतिराम, चंद्रपुर के राजू ठाकुर आदि उपकरण पाकर संतुष्ट दिखाई दिए।
गुजरात से हुई शुरुआत : लोक अदालत की प्रेरणा सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति एवं केंद्रीय विधिक सेवा अभियान के अध्यक्ष पीएन भगवती को गुजरात में छोटे-छोटे झगड़ों को देखकर मिली थी। उन्होंने देशभर में लोक अदालतें लगाने का सुझाव दिया था, जिसमें पक्षकार आपसी सहमति से मामलों का सुलझा सकते हैं।
- देश की पहली लोक अदालत 1987 में गुजरात में लगी थी।
- प्रदेश की पहली लोक अदालत बिलासपुर में अप्रैल 198 में लगी थी।
- सागर की पहली लोक अदालत 1968 में गवर्नमेंट हायर सेकंडरी स्कूल प्रांगण में लगी थी। इसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा सम्मिलित हुए थे। खुरई में 15 फरवरी 1988 को मध्यप्रदेश की पहली तहसील स्तरीय लोक अदालत लगाई गई।
सागर में एेतिहासिक नेशनल लोक अदालत
एक दिन में 15 लाख प्रकरण निपटाए गए
(सागर के कोर्ट परिसर में शनिवार को लाइन में लगकर पैसे जमा करते नेशनल लोक अदालत में आए पक्षकार।)