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स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय में हिंदी दिवस पर संगोष्ठी

7 वर्ष पहले
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सागर . समाजकी अस्मिता गौरव का आधार है संस्कृति। राष्ट्रभाषा से राष्ट्र की संस्कृति, संप्रभुता तथा स्वाभिमान का आदर्श स्थापित होता है। यह बात राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित दमोह के डॉ. श्याम सुंदर दुबे ने कही। वे हिंदी दिवस पर स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय में ‘’मातृभाषा हिंदी की प्रासंगिकता एवं उसकी भूमिका’’ विषय पर संगोष्ठी में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि भाषा समाज, संस्कृति एवं व्यक्तित्व का दर्पण है। इसलिए हमें हिंदी को विशेष महत्व देना चाहिए। कुलाधिपति डॉ. अजय तिवारी ने कहा जरूरी है कि हिंदी की महत्वपूर्ण भूमिका के लिए लोक संपर्क और लोक अभियान चलाया जाए। संस्थापक कुलपति डॉ. अनिल तिवारी ने कहा मातृभाषा द्वारा सामाजिक क्रियाकलाप संपन्न होने से सामाजिक एकता बनी रहती है। संगोष्ठी को प्रभारी कुलपति केए मणिकुमार, डॉ. संगीता सुहाने, डॉ. श्रीकांतशरण पांडेय, अमित मिश्रा, जयकृष्ण पाल्या ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर डॉ. मनीषा मिश्रा, डॉ. वीपी तिवारी, डॉ. राजेश दुबे, डॉ. नीरज तोपखाने, डॉ.प्रमेश गौतम, हरेंद्र सारस्वत, डॉ. राजेंद्र जैन, कमल उसरेठे, डॉ. राम विश्वकर्मा, डॉ. विशंभर सिंह एवं सभी शैक्षिक परिवार उपस्थित रहा। संचालन डॉ. ममता सिंह एवं आभार डॉ. एसएस पांडे ने व्यक्त किया।