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सालभर का टैक्स दे दिया फिर भी निगम ने लोगों को भेजे नोटिस

7 वर्ष पहले
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{ नगरनिगम के राजस्व विभाग में गफलत

{रिकॉर्डभी अपडेट नहीं, लोग हो रहे परेशान

नगरसंवाददाता | सागर

सालभर का जल संपत्तिकर जमा कर चुके शहर के लोगों को लोक अदालत में उपस्थित होने के नोटिस नगर निगम ने भेजे हैं। नोटिस में कर बकाया बताया गया है।

निगम के राजस्व विभाग ने बकाया कर निकालने में इस कदर गफलत की है कि जिन-जिन लोगों को ये नोटिस मिले, वे अपना सिर पीटते फिर रहे हैं। एक-दो नहीं, अमूमन हर वार्ड में लोगों की यही पीढ़ा है। राजस्व विभाग में तो रोज ही जमघट लग रहा है। परेशान लोगों में कोई पार्षद को तो कोई अधिकारी को ढूंढता फिर रहा है। बड़ा सवाल यह है कि क्या निगम के पास चुकता करों का अपडेट रिकॉर्ड नहीं है ? निगम के ही अधिकारी-कर्मचारियों से यह सुना जा सकता है कि यहां सब भगवान भरोसे चल रहा है।

इन्हेंमिले संपत्तिकर के नोटिस : शहरके वर्णी कॉलोनी निवासी रतनचंद जैन अपने मकान का 2014-15 का संपत्तिकर 518 रुपए (खाता क्रमांक 1060270341) 1 अक्टूबर को जमा कर चुके हैं। हाल ही में उन्हें निगम से नोटिस मिला है, जिसमें (खाता क्रमांक 1060270340) में उनका 5 हजार 322 रुपए संपत्ति कर बकाया बताया गया है। नोटिस में कहा गया है कि 13 दिसंबर को यह राशि जमा नहीं करने पर केस न्यायालय में पेश कर दिया जाएगा। इसी प्रकार निर्मल कुमार जैन की शिकायत है कि उनके एक मकान के तीन-तीन संपत्तिकर के बिल भेजे गए हैं। राजेश कुमार जैन, निर्मल कुमार-दिनेश कुमार, साधना/विनोद कुमार को संपत्तिकर जमा करने के बाद भी बकाया टैक्स के नोटिस भेजे गए हैं।

इनकाजलकर बकाया निकाला : कटरावार्ड निवासी सतीशचंद गुप्ता ने बताया कि उन्होंने खाता नंबर 2060270293 का 2014-15 तक का जलकर 1680 रुपए 30 जुलाई को जमा कर दिया था। उनके पास भुगतान की 0280562 नंबर की रसीद भी है। उनके नाम से भेजे गए लोक अदालत के नोटिस में 390 रुपए टैक्स बकाया बताया गया है। यही पीढ़ा इसी वार्ड की छगनबाई/मणीलाल की भी है। उन्होंने साल भर का जलकर 3300 रुपए 30 अप्रैल को जमा कर दिया था। उन्हें 670 रुपए टैक्स बकाया होने का नोटिस मिला है। ऐसे कई और भी उदाहरण हैं।

उपभोक्ताओंसे जबरन वसूली का आरोप : इसीमामले में नेता प्रतिपक्ष चक्रेश सिंघई ने जारी बयान में नगर निगम पर उपभोक्ताओं से जबरन वसूली का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कर वसूली में लगे ठेकेदार सरकारी धन