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संविदा पर डॉक्टर रखने की अनुमति मिले तो शुरू हों बीएमसी के 3 विभाग
बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में खाली पड़े डॉक्टरों टेक्नीकल स्तर के पदों पर संविदा आधार पर नियुक्ति करने की यदि शासन से अनुमति मिल जाए तो काफी हद तक समस्या हल हो सकती है। डीन ने अनुमति के लिए शासन को पत्र भेजा है।
मेडिकल कॉलेज बनने के पांच साल बाद भी यहां मरीजों को कोई खास इलाज नहीं मिल पा रहा। अधिकांश विभागों में डॉक्टरों और टेक्नीशियन के पद खाली हैं। इस कारण प्रबंधन इन्हें चाहकर भी चालू नहीं कर पा रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी तो रेडियोलॉजी और चर्मरोग विभाग में है। करीब एक साल पहले रेडियोलॉजी विभाग में एक रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्त की गई थी। तीन महीने पहले उन्होंने नौकरी छोड़ दी। इस कारण विभाग में सोनोग्राफी जांचें होना बंद हो गई।
इसी प्रकार चर्मरोग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर द्वारा इस्तीफा दिए जाने के बाद करीब एक साल से यह विभाग भी बंद पड़ा है, जो विभाग चल रहे हैं वहां टेक्नीशियनों का अभाव है। मरीजों को ओपीडी में परामर्श तो मिल जाता है, लेकिन छोटी-मोटी जांचें भी नहीं हो पाती। इस समस्या को हल करने के लिए अब कॉलेज प्रबंधन रेडियोलॉजिस्ट एवं चर्मरोग विभाग में संविदा आधार पर डॉक्टरों को रखने की तैयारी में है। इसके लिए डीन डॉ. एलपी वर्मा ने गत दिवस डीएमई को पत्र लिखा है। इसमें कॉलेज में संविदा आधार पर स्टाफ को रखने के लिए अनुमति मांगी गई है। डीन डॉ. एलपी वर्मा ने बताया कि कॉलेज के रेडियोलॉजी चर्मरोग विभाग में डॉक्टर होने से दोनों विभाग बंद हैं। मनोचिकित्सा विभाग की भी यही स्थिति है। इनमें संविदा आधार पर डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए शासन को पत्र भेजा है। यदि स्वीकृति मिल जाती है तो विभाग चालू हो जाएंगे।
बैठकमें मंत्री विधायक ने दिए थे सुझाव
पिछलेमहीने बीएमसी के निरीक्षण पर आए चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री शरद जैन विधायक शैलेंद्र जैन के सामने भी विभागों के बंद होने तथा डॉक्टरों की कमी का मामला उठा था। मंत्री सहित जनप्रतिनिधियों ने भी खाली पदों को संविदा आधार पर भरने की बात कही थी। बैठक में विधायक ने स्टाफ की कमी से संबंधित जानकारी डीन से मांगी थी, ताकि शासन से पद स्वीकृत कराने के प्रयास किए जा सकें।