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वयोवृद्ध क्षुल्लिका अर्हंतश्री माताजी का सल्लेखना पूर्वक समाधिमरण
वर्णीभवन मोराजी में विराजमान आचार्यश्री विभवसागर जी महाराज के ससंघ सानिध्य में वयोवृद्ध क्षुल्लिका अर्हंतश्री माताजी का सल्लेखना पूर्वक समाधिमरण हुआ। उनकी अंतिम शवयात्रा जुलूस के रूप में अतिशय क्षेत्र मंगलगिरि ले जायी गई। जहां पर विधि-विधान पूर्वक उनका अंतिम संस्कार किया गया। 95 वर्षीय श्रीमती उजयारीबाई जैन (पूनाबाई) अस्वस्थ्य अवस्था में पिछले दिनों वर्णी भवन मोराजी में आयी थी।
उन्होंने आचार्यश्री को नमोस्तु कहते हुये दीक्षा लेने की प्रार्थना की तब आचार्यश्री ने परिजनों के समक्ष उन्हें क्षुल्लिका दीक्षा प्रदान की थी तथा उनका नाम अर्हंतश्री माताजी रखते हुए आचार्यश्री ने संयम धारण करने की सम्पूर्ण विधि समझाई। इसके साथ ही उनका अंतिम समय समझकर उनसे सल्लेखना धारण करने को कहा गया। जिसको उन्होंने शिरोधार्य करते हुये मोह माया को त्यागकर आत्मचिंतन दृढ़ कर लिया। 18 सिंतबर गुरुवार की रात्रि में बिगड़ते स्वास्थ्य के चलते माताजी ने चतुर्विध आहार का पूर्णत: रूप से त्याग कर दिया तथा शांत परिणामों से रात्रि में ही इस नश्वर शरीर का परित्याग कर समाधिस्थ हो गई। आज शुक्रवार की सुबह उनके अंतिम संस्कार हेतु उन्हें श्री चंद्रप्रभ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र वर्णीभवन मोराजी से शवयात्रा जुलूस के रूप में अतिशय क्षेत्र मंगलगिरि ले जाया गया। जहां पर आचार्यश्री के सानिध्य में विधि विधान पूर्वक उनकी अंतिम क्रियाएं पूर्ण कराई गई। इस अवसर पर शिखरचंद जैन, खुशालचंद जैन, कैलाशचंद जैन, प्रकाशचंद जैन, केवलचंद जैन, मिट्ठूलाल जैन, विमल कुमार जैन, बाबूलाल जैन, राजेन्द्र कुमार जैन, निर्मल कुमार सराफ, डॉ. क्रांतकुमार सराफ, रमेशचंद जैन, अनिल जैन, नेमीचंद जैन, पं. नन्हेलाल शास्त्री, पं. ज्ञानचंद शास्त्री, अर्शफी लाल जैन आदि सहित बड़ी संख्या में जैन धर्मावलंबी शामिल हुए।