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फर्जी डिप्लोमा लगाकर ढाई साल से कर रहा था नौकरी

7 वर्ष पहले
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मप्रपूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी जबलपुर द्वारा पिछले सालों में संविदा आधार पर की गई लाइन परिचारकों की भर्ती में फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। सागर के सीई कार्यालय ने चार दिन पहले एक लाइन परिचारक को बर्खास्त करने के आदेश दिए हैं। इसने आईटीआई का फर्जी डिप्लोमा लगाकर नौकरी पाई थी। जांच में 15 अन्य कर्मचारियों के दस्तावेज भी संदेह के दायरे में हैं।

पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी सागर सर्किल के सीहोरा में पदस्थ संविदा लाइन परिचारक गोविंद पिता हुकुमचंद तंतुवाय की 19 सितंबर को सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। गोविंद का साल 2011 में संविदा आधार पर चयन किया गया था। उसने आईटीआई सिंगरौली का डिप्लोमा लगाया था। इसमें 2005-07 में इलेक्ट्रिकल ट्रेड में पास होना अंकित था। पिछले दिनों विभाग द्वारा कराए गए भौतिक सत्यापन में यह डिप्लोमा फर्जी निकला। इसके अलावा संभाग के करीब 165 लाइन परिचारकों के दस्तावेजों का सत्यापन संबंधित संस्थाओं से कराया गया है। इनमें से 15 और कर्मचारियों के दस्तावेज संदेह के घेरे में हैं। हालांकि विभाग इनके दस्तावेज दोबारा सत्यापन के लिए भेज रहा है। शेष| पेज 10 पर



फर्जी डिप्लोमा लगाकर ढाई साल से कर रहा था नौकरी

संबंधितोंको नोटिस देकर स्पष्टीकरण भी मांगा गया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार सर्किल में पदस्थ लाइन परिचारकों में से करीब 20 फीसदी मामलों में फर्जीवाड़े का संदेह है। फिलहाल इस मामले में उच्चस्तरीय जांच कराई जा रही है।

सबसे ज्यादा फर्जी डिप्लोमा ग्वालियर क्षेत्र के

बिजली विभाग के अधिकारियों के अनुसार अभी तक सागर सहित अन्य जिलों में आईटीआई के जितने भी डिप्लोमा फर्जी पाए गए हैं उनमें अधिकांश ग्वालियर संभाग में स्थित प्राइवेट आईटीआई संस्थानों के हैं। अधिकांश संविदा लाइन परिचारक ग्वालियर संभाग के ही स्थानीय निवासी हैं।

एफआईआर कराएंगे

चीफ इंजीनियर कार्यालय सागर के सेक्शन ऑफिसर एसएस ठाकुर के अनुसार गोविंद तंतुवाय के मामले में संबंधित थाने तथा पुलिस अधीक्षक कार्यालय को पत्र लिखकर मामले की जानकारी दी गई है। फिलहाल करीब 15 मामलों में आईटीआई का डिप्लोमा फर्जी होने का संदेह है। हालांकि यह सत्यापन की प्रक्रिया में हैं। जितने मामले फर्जी पाए जाएंगे उन पर एफआईआर कराई जाएगी।

एक बर्खास्त, बाकी में जांच जारी

लाइन परिचारक का आईटीआई का डिप्लोम