सागर। गायत्री परिवार के तत्वाधान में चल रहे चौबीस कुंडीय महायज्ञ में डाली गई आहुतियों के साथ बुराइयों का विसर्जन किया गया। सैकड़ों की संख्या में वासंती रंग की वेशभूषा में मौजूद लोगों ने यज्ञ शाला में कुरीतियां छोडऩे का संकल्प लिया। व्यक्ति निर्माण के तीन आवश्यक चरण साधना, उपासना, आराधना के माध्यम से व्यक्ति निर्माण से परिवार निर्माण, फिर समाज एवं युग निर्माण की आधारशिला बनेगी। 21वीं सदी उज्जवल भविष्य लेकर आएगी।
गायत्री परिवार के संस्थापक पंडित राम शर्मा आचार्य का उद्घोष है कि युग निर्माण की शुरूआत ‘नारी जागरण’ से होगी। यह आंदोलन चल पड़ा है। आज सभी जाग रहीं हैं।
पुनर्विवाह हुआ: यज्ञमंडप में मंगलवार को एक विधवा एवं विधुर का पुनर्विवाह हुआ। आयोजकों के मुताबिक इससे यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि नारियों एवं पुरुषों को यह प्रेरणा मिली, विधवा विवाह को गायत्री परिवार भी एक आंदोलन का रूप देगा। जिससे कि विधवा युवती, विवाह योग्य महिला को जिल्लत की जिंदगी जीना पड़े। दोपहर में 3 से 6 बजे तक संगीतमय प्रवचन में उपासना के चरणों की व्याख्या की गई।
विराट दीपयज्ञ हुआ : शाम के समय विराट दीपयज्ञ हुआ। इसमें बड़ी संख्या में दीप प्रज्जवलित किए गए। उद्देश्य रहा कि दिव्य प्रकाश से लोगों के अंदर का अज्ञान रूपी अंधेरा भागेगा और ज्ञान के आलोक में धर्मातता, कुरीतियों एवं विकृतियों से छुटकारा पाकर पवित्र नैतिक एवं मानवीय दैवीय गुणों का विकास होगा। बड़ी संख्या में उपस्थित महिलाओं ने अपनी-अपनी थालियों के दीप जलाए।
महायज्ञ में आज : अंतिम दिन बुधवार को सुबह 6 से 7 बजे तक पांचकोशीय ध्यान साधना, योग होगा। 8 से 12 बजे तक यज्ञ देवपूजन, दीक्षा आदि सभी संस्कार नि:शुल्क संपन्न होंगे। महा पूर्णाहुति होगी। गायत्री परिवार ने सभी धर्मप्रेमियों से महा पूर्णाहुति में भाग लेकर संपूर्ण यज्ञ का पुण्य लाभ लेने को कहा है।
दीप यज्ञ : जले सैकड़ों दीप
(सागर . गायत्री परिवार द्वारा केंद्रीय जेल परिसर में आयोजित गायत्री महायज्ञ के दौरान मंगलवार को दीपयज्ञ का आयोजन किया गया। )